शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

ए मेरे भगवन .बता दे , निर्धन क्या इन्सान नहीं .!!

धनवानों का मान है जग में, निर्धन का कोई मान नहीं.!
ए मेरे भगवन .बता दे , निर्धन क्या इन्सान नहीं .!!
पास किसी के हीरे मोती,पास किसी के लंगोटी है.!
दूध मलाई खाए कोई ,कोई सुखी रोटी है..!
मुझे पता क्या तेरे राज्य में ,निर्धन का सम्मान नहीं..!
धनवानों का मान है जग में, निर्धन का कोई मान नहीं.!!

एक को सुख साधन फिर क्यों एक को दुःख देते हो..
नंगे पाँव दौड़ लगाकर ,खबर किसी की लेते हो .
लोग कहे भगवन तुजे पर में कहता भगवन नहीं..!
धनवानों का मान है जग में, निर्धन का कोई मान नहीं.!!

भक्ति करे जो तेरी वो , बैतरनी को तर जाये
जो न सुमरे तुम्हे भंवर के जाल में वो फस जाये
पहले रिश्वत लिए तो तारे ,क्या इसमें अपमान नहीं..!!
धनवानों का मान है जग में, निर्धन का कोई मान नहीं.!!

तेरी जगत की रित में है क्या हो जग के रखवाले
दे ना सको अगर सुख का साधन तो मुजको तू बुलवाले
अर्जी तेरे है बच्चो की, तू भी तो अनजान नहीं ..!!
धनवानों का मान है जग में, निर्धन का कोई मान नहीं.!
ए मेरे भगवन .बता दे , निर्धन क्या इन्सान नहीं .!!
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