रविवार, 10 मार्च 2013

शिवरात्रि का पर्व है आया संग उत्सव माहोल ले आया

आज के सन्दर्भ में शिव पार्वती का विवाह एक सजग उदाहरण व् मिसाल है
माँ भगवती की जिद्द के मैं तो जटाधारी शिव से ही ब्याह रचाऊँगी और उनके पिता प्रजापति दक्ष की हर नकामयाब कोशिश इस विवाह को रोकने की ......आज भी हर प्रेमी जोड़े ( जो शिद्दत से प्यार करते हैं और एक दूजे से शादी करना चाहते है ) के लिए पूर्ण रूपेण उत्साह और प्रेरणा का आधार बिंदु है ....


शिवरात्रि का पर्व है आया
संग उत्सव माहोल ले आया
रंग अनोखा मंदिर में छाया
नर नारी बालक ने मिलकर
शिव्-पार्वती का ब्याह रचाया || जय माँ गौरा जय भोले नाथ ||

ले बेल-पत्र , धतुरा और भांग
पहुच रहे सब जन तेरे द्वार
मनाने को पावन ये त्यौहार
तुझ वैरागी ने जब तज वैराग
बसाया घर संसार माँ गौरा के साथ || जय माँ गौरा जय भोले नाथ ||

अजब बारात, हैरान घरात
राख लपेट, ओढ़ मृग छाल,
गले में पहन नागो का हार
पहुचे शिव माँ गौरा के द्वार
देव गन्धर्व कर रहे पुष्प फुहार || जय माँ गौरा जय भोले नाथ ||

नयनाभिराम छवि अति प्यारी
शिव पार्वती की जोड़ी न्यारी
हर लड़का लड़की मनाये मन में
ब्याह रचाने को मिले साथी मनोहार
ऐसा तुम्हारा अर्धनारीश्वर अवतार || जय माँ गौरा जय भोले नाथ ||

लो शिवरात्रि का पर्व है आया
संग उत्सव माहोल ले आया
रंग अनोखा मंदिर में छाया
नर नारी बालक ने मिलकर
शिव्-पार्वती का ब्याह रचाया || जय माँ गौरा जय भोले नाथ ||

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