"आओ! गाँव चलें..." — एक नई उम्मीद, एक नई पहल
कभी सोचा है...
गाँव को छोड़े कितने बरस बीत गए?
किसी को सौ साल, किसी को अस्सी, साठ, चालीस या बीस साल...
वक़्त की रफ्तार तेज़ रही, लेकिन यादें वहीं ठहरी रहीं।
मन के कोने में अब भी गाँव की वही तस्वीर बसी है।
यादों की गलियों से...
कई लोग हैं जो आज भी गाँव का नाम बड़े गर्व से लेते हैं, पर बरसों से वहाँ गए नहीं।
कुछ कभी-कभार लौटते हैं, तो कुछ अब भी उस मिट्टी की सौरभ को महसूस करते हैं।
वो गलियाँ आज भी बुलाती हैं...
पीपल की छाँव, तालाब का किनारा, मंदिर की घंटियाँ,
रविवार की गोठ, ताश की महफिल, हँसी-ठिठोली भरे लम्हे —
सब जैसे कहीं मन में ठहरे हैं।
यादें आती हैं...
बड़ों के हाथ की स्नेहभरी रोटियाँ,
भाभियों के हाथ की वो चाय की प्याली —
जिसमें स्वाद से ज्यादा अपनापन होता था।
वो गाँव... जहाँ दिल खुले थे
हाँ, वहाँ बड़ी गाड़ियाँ नहीं थीं, न ऊँची कोठियाँ थीं,
सड़कों की चौड़ाई सीमित थी...
पर दिल बड़े थे।
बिना बनावट, बिना दिखावे के —
सिर्फ प्रेम से भरे हुए।
अब वक़्त है लौटने का... कुछ लौटाने का
आज हम में से कई लोग उस गाँव से निकलकर ऊँचाइयाँ पा चुके हैं।
नाम कमाया है, पहचान बनाई है।
तो क्या अब हमारा फर्ज़ नहीं बनता
कि उस माटी को कुछ लौटाएँ?
हर कोई अपनी श्रद्धा, शक्ति और भावना के अनुसार
गाँव के लिए कोई एक छोटा सा काम चुन सकता है —
स्कूल या पुस्तकालय बनवाना
जल-संरक्षण की पहल
वृद्धाश्रम या गौशाला
छात्राओं की शिक्षा
खेल प्रांगण, स्वास्थ्य सेवा या डिजिटल सुविधा
कुछ भी — बस मन से चुना जाए।
तो फिर, क्या नहीं हो सकता?
बस कोई दस आगे आएं... हाथ पकड़ें, दीप जलाएँ
आओ साथ चलें —
कोई सिर्फ 10 आगे आ जाएं,
हाथ पकड़ कर चलिए —
एक दीप गाँव की ओर जलाएँ।
क्योंकि जिस मिट्टी ने हमें खड़ा किया,
अब समय है उसे संवारने का।
वो ऋण चुकाने का, जो हमारे गाँव ने चुपचाप हमें दिया।
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गाँववालों से एक निवेदन...
आज आपके गाँव के माटी-पुत्रों ने दूर जाकर आपके नाम को रोशन किया है।
पर उनके हृदय में आज भी वही आत्मीयता, वही सम्मान, वही प्रेम बाकी है।
क्या आप उनके लौटने पर उन्हें अपनापन देंगे?
क्या उन्हें वो मान-सम्मान मिलेगा
जो उन्हें फिर से गाँव से आत्मिक रूप से जोड़ सके?
आपका प्रेम, आपका स्वागत —
उन्हें गाँव की ओर खींच लाएगा।
और तब हम सब मिलकर गाँव और मानवता के लिए
कुछ बड़ा, कुछ सुंदर रच सकेंगे।
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"आओ! गाँव चलें..."
एक नई उम्मीद, एक नई पहल के साथ...
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