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गुरुवार, 10 जुलाई 2025

बुढ़ापे को बीमारी न समझें,👉 बदलाव को नुकसान न मानें।

विदेश के एक अस्पताल के निदेशक ने बुज़ुर्गों के लिए 5 अहम बातें बताई हैं:-


कई "बीमारियाँ" असल में बीमारी नहीं, बल्कि सामान्य बुढ़ापा हैं।

  1. आप बीमार नहीं हैं, आप बस बूढ़े हो रहे हैं।

  2. जिन तकलीफों को आप बीमारी समझते हैं, उनमें से ज़्यादातर दरअसल उम्र बढ़ने के सामान्य संकेत हैं।

  3. भूलने की बीमारी का मतलब अल्ज़ाइमर नहीं होता।

अगर आप चाबी कहां रखी है भूल जाएं, लेकिन बाद में खुद ही ढूंढ लें, तो ये डिमेंशिया नहीं है। घबराने की ज़रूरत नहीं — ये बुढ़ापा है, कोई रोग नहीं।

  1. धीरे चलना या पैरों का कांपना लकवा नहीं है।

ये मांसपेशियों की कमजोरी का संकेत हो सकता है। इसका इलाज दवा नहीं बल्कि व्यायाम है।

  1. नींद न आना मतलब इंसोम्निया नहीं है।

बुढ़ापे में दिमाग की नींद की प्रक्रिया बदलती है — इसे "स्लीप स्ट्रक्चर" का बदलाव कहते हैं। नींद की गोली लेना खतरनाक हो सकता है — इससे गिरने का जोखिम बढ़ता है, और याददाश्त पर असर पड़ता है। बेहतर उपाय है, दिन में धूप में समय बिताना, नियमित दिनचर्या रखना, यही सबसे अच्छी "नींद की दवा" है।

  1. शरीर में दर्द यानी गठिया या ऑस्टियोपोरोसिस नहीं है।

बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं — हाथ-पैर में हर जगह दर्द है, क्या ये रूमेटिज़्म है या हड्डियों की कमजोरी है ?
हां, उम्र बढ़ने से हड्डियाँ पतली होती हैं, लेकिन 99% दर्द नसों की उम्र से जुड़ा होता है, इसे “सेंट्रल सेंसिटाइजेशन” कहते हैं।
दवा से आराम नहीं मिलेगा, हल्का व्यायाम और फिजियोथेरेपी ही कारगर उपाय है। सोने से पहले गरम पानी में पैर डुबाना + गर्म सेंक + हल्की मालिश, दवा से कहीं ज़्यादा असरदार है।

  1. टेस्ट रिपोर्ट में असामान्यता मतलब बीमारी नहीं होती।

हो सकता है रिपोर्ट के मापदंड पुराने हों। WHO कहता है, बुज़ुर्गों के शारीरिक संकेत थोड़े लचीले होने चाहिए। जैसे थोड़ा ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल नुकसान नहीं करता, बल्कि लंबे जीवन में मदद करता है क्योंकि कोलेस्ट्रॉल से हार्मोन और कोशिकाओं की झिल्ली बनती है। बहुत कम कोलेस्ट्रॉल से इम्युनिटी घटती है।

"अमरीकी हस्पतालों की हाई ब्लड प्रेशर गाइडलाइन" कहती है — बुज़ुर्गों के लिए ब्लड प्रेशर <150/90 mmHg तक ठीक है न कि <120/80, जो युवाओं के लिए है।
👉 बुढ़ापे को बीमारी न समझें,

👉 बदलाव को नुकसान न मानें।

बुढ़ापा कोई रोग नहीं — यह जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।?"

बुज़ुर्गों और उनके बच्चों के लिए तीन ज़रूरी बातें:-

  1. हर असहजता बीमारी नहीं होती — यह याद रखें।

  2. बुज़ुर्गों का सबसे बड़ा "डर" है चैक अप।

हेल्थ चेकअप रिपोर्ट या विज्ञापन देखकर बिलकुल डरिए मत।

  1. बच्चों की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी केवल माँ-बाप को अस्पताल ले जाना नहीं है, बल्कि उनके साथ टहलना, धूप में बैठना, खाना, बातें करना, यही असली दवा है।

बुढ़ापा दुश्मन नहीं है, गलतफहमी ही असली दुश्मन है ....?

जय श्री कृष्ण जी
🌹🙏🌹

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