जय श्री कृष्णा, ब्लॉग में आपका स्वागत है यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें। मैं हर इंसान के लिए ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ब्लॉग को बनाए रख रहा हूँ। धन्यवाद, "साँवरिया " #organic #sanwariya #latest #india www.sanwariya.org/
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शनिवार, 30 अगस्त 2025
मोदी सरकार को गिराने के लिए ऑपरेशन 37 "डीप स्टेट" शुरू हो चुका है
संयुक्त परिवार को तोड़कर उपभोक्ता बनाया गया भारत: एक खतरनाक साजिश की सच्चाई
शुक्रवार, 29 अगस्त 2025
महाभारत के बाद लोहार्गल जहां पानी से गल गए थे पांडवों के अश्त्र शस्त्र?🚩👇👆
बुधवार, 27 अगस्त 2025
निब पैन कभी ना चले तो हम सभी ने हाथ से झटका देने के चक्कर में आजू बाजू वालों पर के कपड़ों पर स्याही जरूर छिड़कायी होगी....!!
तब कैमलिन की स्याही प्रायः हर घर में मिल ही जाती थी......कोई कोई टिकिया से स्याही बनाकर भी उपयोग करता था और बुक स्टाल पर शीशी में स्याही भर कर रखी होती थी 5 पैसा दो और ड्रापर से खुद ही डाल लो ये भी सिस्टम था.........जिन्होंने भी पैन में स्याही डाली होगी वो ड्रॉपर के महत्व से भली भांति परिचित होंगे.......!
कुछ लोग ड्रापर का उपयोग कान में तेल डालने में भी करते थे.......
महीने में दो-तीन बार निब पैन को खोलकर उसे गरम पानी में डालकर उसकी सर्विसिंग भी की जाती थी और लगभग सभी को लगता था की निब को उल्टा कर के लिखने से हैंडराइटिंग बड़ी सुन्दर बनती है.......
सामने के जेब मे पेन टांगते थे और कभी कभी स्याही लीक होकर सामने शर्ट नीली कर देती थी जिसे हम पौंक देना कहते थे......कापी में पौंक देने पर हम ब्लैक बोर्ड के नीचे चाक के टुकड़े ढूंढते थे जो कि स्याही सोखने का काम करते थे.... स्याही से भरे हाथों को हम सिर के बालों में पोंछ लेते थे........इसी वजह से हमारी पिटाई घर और स्कूल में भी होती थी........
हर क्लास में एक ऐसा योद्धा होता था जो पैन ठीक से नहीं चलने पर ब्लेड लेकर निब के बीच वाले हिस्से में बारीकी से कचरा निकालने का दावा कर लेता था.........!!
नीचे के हड्डा(जिब)को घिस कर परफेक्ट करना भी एक आर्ट था........!!
हाथ से निब नहीं निकलती थी तो दांतों के उपयोग से भी निब निकालते थे...दांत , जीभ औऱ होंठ भी नीला होकर भगवान महादेव की तरह हलाहल पिये सा दिखाई पड़ता था.......
दुकान में नयी निब खरीदने से पहले उसे पैन में लगाकर सेट करना फिर कापी में स्याही की कुछ बूंदे छिड़क कर निब उन गिरी हुयी स्याही की बूंदो पर लगाकर निब की स्याही सोखने की क्षमता नापना ही किसी बड़े साइंटिस्ट वाली फीलिंग दे जाता था......!
निब पैन कभी ना चले तो हम सभी ने हाथ से झटका देने के चक्कर में आजू बाजू वालों पर के कपड़ों पर स्याही जरूर छिड़कायी होगी....!!
कुछ बच्चे ऐसे भी होते (हम नहीं...) थे जो पढ़ते लिखते तो कुछ नहीं थे लेकिन घर जाने से पहले उंगलियो में स्याही जरूर लगा लेते थे.......बल्कि पैंट पर भी छिड़क लेते थे ताकि घरवालों को देख के लगे कि बच्चा स्कूल में बहुत मेहनत करता है.......!!
यह निब वाला पेन हथियार का काम भी करता था....कोई जब मारने आता था तो बचाव के लिए तुरंत पेन का ढक्कन खोल कर खुद को महाराणा प्रताप समझते थे....
बिखरी बिसरी यादें....
विश्व का सबसे प्राचीन, वैज्ञानिक और विस्तृत समय गणना तंत्र — भारतीय ऋषि-मुनियों की अद्भुत देन
सेव कर सुरक्षित कर लीजिए — ऐसी पोस्ट विरले ही मिलती है!
⏳ क्षण-क्षण की वैज्ञानिक गणना
- 🔹 1 काष्ठा = सेकंड का 34,000वां भाग
- 🔹 1 त्रुटि = सेकंड का 300वां भाग
- 🔹 2 त्रुटि = 1 लव = 1 क्षण
- 🔹 30 क्षण = 1 विपल
- 🔹 60 विपल = 1 पल
- 🔹 60 पल = 1 घड़ी = 24 मिनट
- 🔹 2.5 घड़ी = 1 होरा (घंटा)
- 🔹 3 होरा = 1 प्रहर
- 🔹 8 प्रहर = 1 दिवस (वार)
🗓️ काल चक्र का विस्तार
- 🔸 24 होरा = 1 दिन
- 🔸 7 दिन = 1 सप्ताह
- 🔸 4 सप्ताह = 1 माह
- 🔸 2 माह = 1 ऋतु
- 🔸 6 ऋतुएं = 1 वर्ष
- 🔸 100 वर्ष = 1 शताब्दी
- 🔸 10 शताब्दियां = 1 सहस्राब्दी
- 🔸 432 सहस्राब्दी = 1 युग
- 🔸 2 युग = द्वापर युग
- 🔸 3 युग = त्रेता युग
- 🔸 4 युग = सतयुग
- ✅ सतयुग + त्रेता + द्वापर + कलियुग = 1 महायुग
- 🔸 72 महायुग = 1 मन्वंतर
- 🔸 1000 महायुग = 1 कल्प
🌊 प्रलय और पुनर्निर्माण का विज्ञान
- 🌀 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (पृथ्वी पर जीवन का अंत और पुनः आरंभ)
- 🌀 1 नैमित्तिक प्रलय = 1 कल्प (देवों का अंत और जन्म)
- 🌀 1 महालय = 730 कल्प (ब्रह्मा का अंत और पुनर्जन्म)
🕯️ भारत की अद्वितीय द्वैत और त्रैतीय संरचना
🟢 दो (2) की व्यवस्था:
- नर – नारी
- शुक्ल पक्ष – कृष्ण पक्ष
- वैदिक पूजा – तांत्रिक पूजा
- उत्तरायण – दक्षिणायन
🔵 तीन (3) का समन्वय:
- ब्रह्मा – विष्णु – महेश
- महा सरस्वती – महा लक्ष्मी – महा गौरी
- पृथ्वी – आकाश – पाताल
- सत्वगुण – रजोगुण – तमोगुण
- ठोस – द्रव – वायु
- प्रारंभ – मध्य – अंत
🙏 जय भारत। जय वैदिक विज्ञान। जय सनातन संस्कृति।
#वैदिकविज्ञान #भारतीयगौरव #SanatanDharm #TimeScience #VedicTime #IndianHeritage #ProudToBeIndian #सनातनज्ञान #BharatKaGaurav
मंगलवार, 26 अगस्त 2025
अब रो रहे हैं तो रोओ
अब रो रहे हैं तो रोओ
ऑटो वाले ने मुंह मांगी कीमत मांगी और ब्लैक मेल कर बाध्य किया ओला-उबर रैपीडो के लिए!
BSNL कस्टमर केयर वालों ने 2 -2 घण्टे होल्ड पर रखकर मजबूर किया एयरटेल,वोडाफोन के लिए!
कुछ दुकानदारों ने दो गुना तीन गुना कीमत वसूली और नकली माल देकर मजबूर किया ऑनलाइन शॉपिंग के लिए!
सरकारी अस्पताल के लापरवाही और ग़ैरजिम्मेदाराना व्यवहार ने मजबूर किया प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए,
रोडवेज के धीमे,असुविधाजनक सफर ने मजबूर किया प्राइवेट बसों में डीलक्स कोच के लिए!
सरकारी स्कूल में रिक्त पद, लचर पढ़ाई, अव्यवस्थित प्रबंध और दायित्वबोध की कमी ने मजबूर किया प्राइवेट स्कूल के लिए!
सरकारी बैंक की दादागिरी,ने मजबूर किया प्राइवेट बैंक में खाता खोलने को!
अब रो रहे BSNL बिक जाएगा,
एयर इंडिया बन्द हो जाएगी
तो होने दो!
प्रकृति योग्य का वरण कर नालायकों का मरण स्वयं कर देती है...
प्रश्न -कितने लोगों को भारत संचार निगम लिमिटेड की चिंता है?
उत्तर- सभी को ।
कितने लोग भारत संचार निगम लिमिटेड की सिम का प्रयोग करते हैं?
उत्तर- कोई नहीं।
प्रश्न - सरकारी स्कूल की चिंता कितने लोग करते हैं?
उत्तर- सभी करते हैं!
प्रश्न - सरकारी स्कूल में कितने लोगो के बच्चे पढ़ते हैं?
उत्तर- किसी के नहीं।
प्रश्न - कितने लोग पालीथीन मुक्त वातावरण चाहते हैं?
उत्तर - सभी चाहते हैं!
प्रश्न - पालीथीन का प्रयोग कौन नहीं करता?
उत्तर- सभी करते हैं।
प्रश्न -भ्रष्टाचार मुक्त भारत कौन कौन चाहते हैं?
उत्तर-सभी चाहते!
प्रश्न - अपने व्यक्तिगत काम के लिए कितने लोगों ने रिश्वत नहीं दी?
उत्तर - सभी ने अपने व्यक्तिगत काम के लिए किसी न किसी को किसी न किसी रूप में रिश्वत जरूर दी है।
प्रश्न- गिरते रुपये की चिंता कितने लोग करते हैं?
उत्तर- सभी करते हैं ।
प्रश्न- कितने लोग सिर्फ स्वदेशी सामान खरीदते हैं?
उत्तर- कोई नहीं ।
प्रश्न- यातायात की बिगड़ी हालात से कौन कौन दुखी है?
उत्तर - सभी दुखी ।
प्रश्न- यातायात के नियमों को 100% पालन कौन कौन करता है?
उत्तर- कोई नहीं ।
प्रश्न- बदलाव कौन कौन चाहते हैं?
उत्तर- सभी चाहते।
प्रश्न- खुद कितने लोग बदलना चाहते हैं?
उत्तर - कोई नहीं ।
संभलने की जरूरत है !!
1. चोटियां छोड़ी ,
2. टोपी, पगड़ी छोड़ी ,
3. तिलक, चंदन छोड़ा
4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी ,
5. यज्ञोपवीत छोड़ा ,
6. संध्या वंदन छोड़ा ।
7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा ,
8. महिलाओं, लड़कियों ने साड़ी छोड़ी, बिछिया छोड़े, चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ी।
9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है)
10. संस्कृत छोड़ी, हिन्दी छोड़ी,
11. श्लोक छोड़े, लोरी छोड़ी ।
12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े ,
13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी ,
14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छूना छोड़े ,
15. घर परिवार छोड़े (अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)।
अब कोई रीति या परंपरा बची है? ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या कुछ और हो!
कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैंने ऐसे जीवित रखा है।
जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।
बौद्धों ने कभी सर मुंड़ाना नहीं छोड़ा!
सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!
मुसलमानों ने न दाढ़ी छोड़ी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!
ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!
फिर हिन्दू अपनी
पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ?
कहाँ लुप्त हो गयी- गुरुकुल की शिखा, यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र, नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?
हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।
अपनी पहचान बनाओ!
मंगलवार, 12 अगस्त 2025
आयकर विधेयक 2025 में मुख्य बदलाव
शनिवार, 9 अगस्त 2025
अमेरिका पिछले 100 सालों से महाशक्ति रहा है। उन्होंने हर उस देश को नष्ट कर दिया है जिसने उन्हें चुनौती दी।
त्योहार भारतीय हैं — मिठास भी भारतीय होनी चाहिए।🎁 इस रक्षाबंधन, कुछ असली, ताज़ा, भारतीय मिठाइयों का चयन करें।
बुधवार, 6 अगस्त 2025
🚗 नई कार के पहले 1000 KM: 15 जरूरी सावधानियाँ!
📢 Blinkit की 8 मिनट डिलीवरी सेवा – एक सुविधा या खतरा?
मंगलवार, 5 अगस्त 2025
मोदी के रहते अमेरीका का आगे बढ़ना कठीन है..“न्यू यार्क टाइम्स” का मुख्य संपादक "जोसफ होप" ने इस पर एक सनसनीखेज टिप्पणी किया है..
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