मंगलवार, 21 मई 2013

तो 30 लाख लोगों को दांतून बेचने का रोजगार मिल जायेगा इस देश में।

अगर आप पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो निचे दिए गए लिंक में जाके विडियो देखे:
http://www.youtube.com/watch?v=IcdRABIYv9E

टूथपेस्ट (Toothpaste) मत करिए खर्च बचेगा। यह टूथपेस्ट बड़े महंगे है 30 रूपए का 100 ग्राम माने 300 रूपए किलो। एक आदमी रोज जो ब्रश करता है सबेरे में उसमे देड से दो ग्राम टूथ पेस्ट इस्तेमाल होता है, अगर वो आदमी अपनी जिन्दगी की 60 साल तक ब्रश करता रहें तो एक आदमी का टूथपेस्ट का खर्च एक लाख चालिस हज़ार रूपए आता है। क्या फालतू खर्च है!!! बंध करिए ये, इसकी कोई जरुरत नही है, ब्रश को पेस्ट लगाके रगड़ने की कोई जरुरत नही है।

फ़ोकट का काम करिए - दांतून करिए: नीम की दांतून, बबूल की दांतून, पाकड़ की दांतून, करंज की दांतून, अमरुत की दांतून, आम की दांतून ... ऐसे बारा तरह के दांतून है उनकी दांतून करो टैक्स फ्री कोस्ट फ्री। इसका साइड इफ़ेक्ट कुछ नही है एक्सपैरी डेट कुछ नही है। एक एक दांतून को साथ दिन तक चलाइए ! कैसे ? - दांतून किया चबाया आगे का हिस्सा काट लिया और पानी में भिगोके रखा फिर अगले दिन किया ऐसे साथ दिन चलती हैं।
एकबार क्या हुआ एक IIT का लड़का जो बहुत बुद्धिमान होते हैं राजीव भाई को पूछ लिया के, क्या मुर्खता करते है आप ? एक दांतून को साथ दिन करते है ? इसके जवाब में राजीव भाई ने उस लड़के से पूछा के तू एक टूथब्रश को कितने दिन करता है ? लड़के ने जवाब दिया के मैं तो साल भर तक करता हूँ। फिर राजीव भाई ने जवाब दिया के तू महामूर्ख है मैं तो साथ दिन में बदल देता हूँ और तू एक ही ब्रश को साल भर रगड़ता रहता हैं !!!
और ये ब्रश की मुस्किल पता है आपको क्या है ? टूथब्रश में प्लास्टिक के ब्रस्सेल्स होते हैं, उनको जब हम रगड़ते हैं तो मसुडो पर उनका घर्षण होता हैं उससे मसूड़े सब चिल जाते है कमजोर हो जाते है, और जिनके मसूड़े कमजोर होते है उनके दांत कमजोर होते है, जिनके दांत कमजोर है उनकी जिन्दगी में कोई आनंद नही है।

दूसरी समस्या है टूथब्रश की जहां ब्रस्सल्स लगे होते है उहाँ पर पिला पिला सफ़ेद कचरा जमा हो जाता है उसपर हजारो वायरस जिबाणु पनपता है और रोज आप अपने मुह में डालके क्या खतरनाक काम कर रहे हो?
ये जो टूथपेस्ट है इसमें झाग बहुत बनता है !! पर झाग तो वाशिंग पाउडर में भी बनता है, झाग तो शेविंग क्रीम में भी बनता है। जिस वस्तु से शेविंग क्रीम में और वाशिंग पाउडर में झाग बनता है वोही वस्तु टूथपेस्ट में मिलाई जाती है और उसको कहते है सोडियम लोराइल सल्फेट (Sodium Lauryl Sulfate)। और यह ऐसा खतरनाक केमिकल है जो कैंसर कर देता हैं।

एक सच्चाई जान लीजिये अमेरिका और यूरोप के देशों में टूथपेस्ट जब बाज़ार में बेचा जाता है तो उसपर चेतावनी लिखी रहती है और उसमे कहा जाता है सावधान टूथपेस्ट करने से कैंसर होता है अंग्रेजी में लिखते है ‘It is carcinogenic’ और लिखा रहता है ‘Please keep out this toothpaste from reach of the children bellow six years.’ माने छेह साल से छोटे बच्चो को यह टूथपेस्ट कभी मत कराना क्योंकि बच्चे उसे चाट लेते हैं और वो कैंसर से मर सकते हैं। फिर टूथपेस्ट पर लिखते है : In case of accidental ingestion please contact immediately poison control centre. माने गलती से पेस्ट अगर कर लिया बच्चे ने तो हॉस्पिटल लेके जाना उसको , उसमे ज़हर है ! क्या ज़हर है ? उसमे एक केमिकल हैं जिसका नाम है सोडियम लोराइल सल्फेट ये केमिकल की एक बूंद भी अगर आपकी जीव पर गिर दे तो जीव पर ही कैंसर हो जाते है।
तो दांत कैसे साफ़ करेंगे आप ? दांतून से नही तो दन्तमंजन से। दन्तमंजन भी फ़ोकट वाला करिए खर्च नही करना।

1. घर के रसोई से थोडा हल्दी, सरसों का तेल और नमक ले लो तीनो को मिलाओ दांत पे घिसो सबसे अच्छा दन्तमंजन है।

2. गोबर के कंडे को जलाने के बाद जो राख मिलती है उसमे थोडा नमक और फिटकरी मिलाके दांत में घिसो इससे अच्छा दन्तमंजन दुनिया में नही है।

3. नीबू की छिलके को उलट दो उसपर नमक डालके दांतों पर घिसो तो दांत एकदम साफ़।

4. जिनके दांत पीले पड़ गए वे आमके पत्ते को चबाओ थोड़ी देर फिर उस चटनी को दांत पर घिसो तो दांत एकदम सफ़ेद हो जाते हैं।

आप यह नही कर सकते तो दन्तमंजन खरीद लो बाजार में बहुत सारे मिलते है जैसे लाल, काला दन्तमंजन, विको वज्रदंती, दिव्ययोग दन्तमंजन इत्यादि।

और ये जिनती भी टूथपेस्ट बनते है जैसे कोलगेट, क्लोज आप, पेप्सोडेंट यह जादातर टूथपेस्ट बनते है जानवरों की मरे हुए हड्डीओं से। हमारे देश में हजारों कतलखाने चलते है जहाँ गाय बैल भैंस को काटते है उनका मांस बाज़ार में बिकती है, उन जानवरों की हड्डीओं को टूथपेस्ट बनाने वाली कंपनिया खरीदती है। हड्डीओं को धुप में सुखाती है फिर बोन क्रेशेर में डालके उसका पाउडर बनाते है फिर उसी से पेस्ट बनता है फिर उसीको हम मुह में लगाते हैं रोज सबेरे ही सबेरे और जिसदिन उपबास होता है उसदिन तो जरुर। भगवान की पूजा करते है और सबेरे सबेरे हड्डीओं का चुरा मुह में लगाते हैं फिर भगवान प्रसन्न कैसे होंगे?

अगर हर भारतवासी टूथपेस्ट और ब्रश करना बंध कर दे और उसी पैसे से दांतून खरीदने लगे 50 पैसे की एक दांतून तो 30 लाख लोगों को दांतून बेचने का रोजगार मिल जायेगा इस देश में। अब दांतून करनी है तो पेड़ भी लगाना पड़ेगा जैसे नीम, करंज, बबूल इत्यादि का और जब आपके जन्मदिन आते है उसदिन एक पेड़ लगाओ साल में एक।

आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद!

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