बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

गीली हल्दी के सेवन के लाभ

गीली हल्दी ---
इन दिनों बाज़ार में गीली हल्दी उपलब्ध होती है जो दिखने में अदरक की तरह होती है . इसके सेवन के कई लाभ है ----
- इसमें करक्यूमिन होता है जो केंसर से लड़ता है . इसलिए केंसर के रोगी इसका रस सुबह खाली पेट अवश्य ले .
- यह बुढापे से दूर रखता है . अंदरूनी चोटों को भी ठीक करता है .
- इसका एक टुकडा मुंह में रखने से गले की खराश , खांसी , ज़ुकाम , दमा आदि दूर होता है .
- दिन गीली हल्दी मिले , खाना बनाने में इसी को कद्दूकस कर प्रयोग करे .
- सुबह गर्म पानी पीते समय इसे भी पानी में डाल दे .
- साबुत हल्दी के टुकड़ों को तवे पर भूनकर पीसकर शहद मिलाकर लेने से सर्दी, जुकाम, मौसमी संक्रमण में लाभ होता है।
- इसके टुकड़े अचार में डाले . एक अनोखे स्वाद वाला अचार तैयार हो जाएगा .छिली हुई कद्दूकस की हल्दी और कटी हुई हरी मिर्च को ,हल्दी नमक,राई की दाल ,नीबू का रस ,काला नमक ,जीरा पावडर,मिलाकर कांच की बरनी में १२ घंटे के लिए बंद कर धूप मैं रख दें.दुसरे दिन तेल मैं हिंग और मेथी दाने से तडका देकर ,ठंडा कर के अचार मैं मिक्स कर दें .अचार तैयार है तुरत या दो घंटे बाद आलू.मेथी या पालक के परांठों के साथ खाइए.इसे फ्रिज मैं रखे न तो ज्यादा दिनों तक चलेगा.
- इसकी सब्जी खाने से भयंकर सर्दी में भी कोई परेशानी नहीं होती .हल्दी की सब्जी में प्रयुक्त होने वाली सामग्री -
1-कच्ची (गीली) हल्दी की गांठे 500 gm
2-अदरक 200 gm
3-प्याज 250 gm
4-लहसुन 30 gm
5-टमाटर 500 gm
6-हरी मिर्च
7-दही 750 gm
8-देशी घी 500 gm
मिर्ची पाउडर,नमक,धनिया,जीरा,सौंफ,साबुत गर्म मसाला

हल्दी की सब्जी बनाने के लिए तैयारी-
1-सबसे पहले कच्ची हल्दी की गांठों को छीलकर कस लें (जैसे गाजर का हलवा बनाने के लिए गाजर को कस्तें है) |
2-अदरक को भी छीलकर कस लें और एक बर्तन में रख दें |
3-प्याज को छीलकर गोल कटिंग करें जैसे सलाद के लिए करते है |
4-लहसुन को छीलकर बारीक पीस कर एक कटोरी में रखलें |
5-टमाटर काटें (एक टमाटर के दो या तीन टुकडें ही करें) टमाटर ताजे होने चाहिए पिचके हुए नहीं |
6-हरी मिर्च को चीरा लगाकर उसके अन्दर से बीज निकाल दें व उसके चार टुकड़े कर लें |

उपरोक्त तैयारी करने के बाद अब सब्जी बनाना शुरू करतें है -
1-कड़ाही में घी गर्म करें व उसमे कसी हुई हल्दी को तब तक तलें जब तक हल्दी का रंग में हल्का भूरापन आ जाए | आंच को मंदा रखें | तलने के बाद तली हल्दी को घी से बाहर निकालकर एक बर्तन में रख दें |
2-अब उसी घी में प्याज भुनें तब तक जब तक प्याज का रंग गुलाबीपन पर आ जाएँ | भूनने के बाद प्याज को निकालकर एक अलग बर्तन में निकाल लें |
3-अब 3/4 किलो दही को एक बर्तन में लें व उसमे अपने स्वाद के हिसाब से मिर्ची पाउडर,धनिया,नमक आदि मसाले डालकर अच्छी तरह फैंट कर मिला लें |(बर्तन सिल्वर या कांसे का प्रयोग करें )|
4-अब एक दुसरे बर्तन (कड़ाही)में जो कांसे या सिल्वर का हो में उपरोक्त तलने के बाद बचे घी को छानकर गर्म करें और गर्म होते ही उसमे सौंफ,अदरक ,गर्म मसाला ,थोडा जीरा ,पीसा हुआ लहसुन,मिर्ची के कटे टुकड़े डालकर फ्राई करें | हल्का फ्राई होने के बाद दही में तैयार किया हुआ मसाला डाले दें | और इसमें उबाल आने के बाद आंच धीमी करके उसे तब तक पकाएं जब तक दही का पानी पूरी तरह से सुख ना जाएँ | पानी सुखते ही इसमें हिलाए जाने वाले चम्मच पर घी की मात्रा दिखाई देने लग जाएगी व दही की जाली बन जाएगी |
5-अब इस मसाले में उपरोक्त तली हुई सामग्री (हल्दी व प्याज) डाल दें व एक उबाल आने दें |
6-पहले उबाल के बाद कटे हुए टमाटर व हरा धनिया डालकर एक बार हिला दें व बर्तन का ढक्कन बंद कर चूल्हे से उतार लें , उतारने के बाद लगभग बीस मिनट तक ढक्कन ना हटायें |
अब आपकी स्वास्थ्यवर्धक स्वादिष्ट हल्दी की सब्जी तैयार है |

हल्दी की सब्जी खाने का देशी नुस्खा -आमतौर पर हमारे घरों में पतली रोटी बनती है पर हल्दी की सब्जी के साथ खाने के लिए रोटी मोटी बनवाएँ , एक या दो रोटी को थाली में रखकर उसके ऊपर सब्जी डालें व दूसरी रोटी से सब्जी खाएं , थाली में सब्जी के नीचे रखी रोटियां अंत में खाएं |

उम्रदराज लोग सर्दियों में कच्ची हल्दी की सब्जी का सेवन जरुर करें

चेतावनी - हल्दी की सब्जी में घी की मात्रा अधिक होती है साथ ही ये सर्दियों में बनती है इसलिए सब्जी खाने के तुरंत बाद पानी ना पीयें, वरना गला ख़राब हो सकता है |बहुत ज्यादा प्यास लगने पर गुनगुना पानी पीयें और पानी पीने से पहले एक पापड़ जरुर खाएं |

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