गुरुवार, 22 मई 2014

यहां अक्सर गोले,गेंद की शक्ल की बिजलियां देखी जाती हैं- Dr. Sudhir Vyas

एक और अत्यंत रोचक जानकारी आप मित्रों से शेयर कर रहा हूँ -
रूस के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है वोल्गोग्राद ओबलस्त (इलाका), यहां बहुत से ऐसे स्थान हैं जिन्हें लेकर लोगों में कई किंवदंतियाँ प्रचलित हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी यहां के निवासी सुनाते आए हैं ..!
कई ऐतिहासिक पुस्तकों में भी इनका उल्लेख मिलता है, पहेलियों और रहस्यों से भरे ये स्थान पुराविदों, इतिहासकारों और क्षेत्रविदों के अध्ययन का विषय हमेशा से रहे हैं अब स्थानीय प्रशासन ने यहां की अदभुत विशेषताओं की वजह से यहाँ पर्यटन-स्थलियां विकसित करने का फैसला किया है..!
यहां दोन नदी के तट पर चाक पत्थर की पहाडियां हैं, एल्टन नाम की रोगहर गुणों वाली झील है, इस इलाके में सराय-बेक नाम की प्राचीन नगरी है| माना जाता है कि यह “स्वर्णिम ओर्दा” नामक राज्य की राजधानी थी,, यहीं पर है वह बस्ती जिसमें स्तेपान राज़िन और येमेल्यान पुगाचोव जैसे विद्रोहियों का जन्म हुआ था ,, लोग इस बस्ती को “बाज का घरौंदा” कहते हैं,, तीन सौ साल तक यहां जितने भी बालक पैदा होते रहे उन सब ने बड़े होकर आज़ादी और न्याय की लड़ाई का नेतृत्व किया| पुराविदों की खोजें यह दिखाती हैं कि यहाँ कभी सरमाती और सुमेर कबीले रहते थे..!!
यहां अंतरिक्षीय आगंतुकों (एलियन/परग्रही) के बारे में भी अनेक किस्से-कहानियां प्रचलित हैं, बीसवीं सदी के आरंभ में यहां एक उल्का-पिंड गिरा था, आज तक इसके टुकड़ों को विशेषज्ञ खोज रहे हैं,, कहते हैं कि जहां यह उल्का-पिंड गिरा था वहां तब से अंतरिक्षीय ऊर्जा संकेंद्रित होने लगी है और यहां आजकल रात को विचित्र किरणें दिखती हैं..!!
वोल्गोग्राद ओबलस्त इलाके का एक और रहस्यमय स्थान है “मेदवेदित्सक्या ग्रिदा” (भालुई श्रृंखला), इस टीलों की श्रृंखला में कई असाधारण परिघटनाएं होती रहती हैं जिनकी कोई व्याख्या अब तक वैज्ञानिक नहीं कर पाए हैं| यहां का एक सबसे रहस्यमय स्थान है “गोला बिजलियों” यानि गेंदनुमा बिजली की ढलान,, यहां अक्सर गोले,गेंद की शक्ल की बिजलियां देखी जाती हैं, इससे भी अधिक आश्चर्य की बात यह है कि इनका “व्यवहार” ऐसा होता है मानो ये विवेकसम्पन्न यानि बुद्धिमान हों और चुनाव संपन्न हो कि किस पर और कहां पर गिरना है और कहां व किस पर नहीं गिरनाहैं.. पूरी दुनिया में गेंद / गोला नुमा बिजली बस यहीं पाई जाती हैं और यह वैश्विक रूप से पैरानॉर्मल व मौसम विभागों का आधिकारिक दस्तावेजों द्वारा मानना है।

by Dr. Sudhir Vyas

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