रविवार, 17 अगस्त 2014

असल में है वही पागल ,

कोई पागल पिता का है ,
कोई पागल है माई का


कोई पागल बहन का है ,
कोई पागल है भाई का

कोई पागल है बेटी का ,
कोई पागल है जमाई का

कोई पागल है इज्ज़त का ,
कोई पागल है कमाई का

कोई पागल है शोहरत का ,
कोई पागल है नारी का

कोई पागल है दौलत का , 
कोई पागल गाड़ी का 

है पागलपन में ये दुनिया ,
की दुःख सुख की पिटारी का

असल में है वही पागल ,
जो पागल है बिहारी का

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