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बुधवार, 20 मार्च 2024

कामाख्या मन्दिर का रहस्य

 

तंत्र साधना और अघोरियों के गढ़ माने जाने वाली कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर है जहां पर कामाख्या देवी मंदिर स्थित है। इस मंदिर को एक काम शक्ति पीठों में से एक माना जाता है।

चलिए अब बात करते हैं कामाख्या देवी मंदिर के रहस्य के बारे में।

कामाख्या मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है। पहला हिस्सा सबसे बड़ा है और इसमें हर व्यक्तियों को जाने नहीं दिया जाता है। वही इस मंदिर के दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां पर एक पत्थर से पानी निकलता रहता है। ऐसा माना जाता है कि महीने के 3 दिन माता को रजस्वला वाला होता है और यह तीन दिनों तक मंदिर के पट बंद ही रहते हैं। 3 दिनों के बाद मंदिर के पट बड़ी धूमधाम से खोले जाते हैं।

पूरे भारत में रजस्वला यानी मासिक धर्म को अछूत माना जाता है। लड़कियों को इस दौरान अक्सर अछूत समझा जाता है। लेकिन कामाख्या के मामले में ऐसा नहीं है। यही कारण है कि यहां पर हर साल अंबुबाची मेला लगता है। और इस मेले के दौरान पास में स्थित ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। फिर 3 दिनों के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर मैं काफी भीड़ उमड़ पड़ती है।

ऐसा कहा जाता है कि जब मां को 3 दिन का राजस्वाला होता है तो सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। जब 3 दिनों के बाद मंदिर का दरवाजा खोला जाता है तो यह सफेद रंग लाल रंग में बदल जाता है। और इसी कपड़ों को अंबुबाची वस्त्र कहते हैं जिसके कारण यहां पर अंबुबाची मेले का आयोजन किया जाता है। और यही वस्त्र को प्रसाद के रूप में भक्तों के बीच बांट दिया जाता है।

यहां पर कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं है जब आप इस मंदिर में प्रवेश करेंगे। तो यहां पर एक समतल चट्टान के बीच बिना विभाजन किए हुए। देवी के योनि को दर्शाता है। एक प्राकृतिक झरने के कारण यह जगह हमेशा गीला रहता है। इस झरने के जल को काफी प्रभावशाली माना जाता है। और शक्तिशाली माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जलसे नियमित सेवन से आप हर बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।

चित्र स्रोत गूगल

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