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सोमवार, 31 मार्च 2025

देश बड़ा या धर्म?

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देश बड़ा या धर्म?

अगर मुझसे ये सवाल आज से 2 साल पहले पूछा गया होता तो देश बोलने में एक सेकेण्ड नहीं लगाता पर आज मैं 'धर्म' बोलने में देर नहीं करूँगा*।

*देश......*… *क्या है देश???*

जब तक आप इस देश में है *जब तक आप इस देश में सुरक्षित हैं* तभी तक तो है ये आपका देश।

देश तो ये तब भी कहलायेगा जब कोई इस देश पर कब्जा कर ले *और आपको भगा दे*… *लेकिन तब ये देश उस आक्रमणकारी का होगा* आपका नहीं।

मतलब साफ है जब तक देश में आपका राज है *तभी तक देश आपका है*।

देश बचता है धर्म से *......*…

जिस मजहब के लोगों के पास *एक भी देश नहीं था उसने सिर्फ धर्म पर अडिग रहकर 56 देश बना लिए* सवाल ये नहीं कि उनका मजहब खराब था या अच्छा।

जिसने धर्म से ज्यादा राष्ट्रीयता को महत्व दिया *उसके हाथ से देश निकल गया* हमारे हाथों से पाकिस्तान के रूप में, अफगानिस्तान के रूप में *देश का बड़ा भाग क्यों निकला???*

क्योंकि हम धार्मिक कम सेक्युलर ज्यादा हो गए *अगर हिंदू कट्टरवादी होते* अड़ जाते *लड़ जाते कि जान जायेगी* लेकिन दूसरे धर्म के लोगों को नहीं देंगे *अपनी जगह तब पाकिस्तान नहीं बनता*।

कैराना, कांधला, अलीगढ़, आसाम, कश्मीर आदि क्यों हिंदुओं के हाथ से निकला *क्योंकि उनके लिए देश पहले था धर्म नहीं* नतीजा धर्म भी गया और देश (स्थान) भी गया।

*अब दो सवाल है ......*…

*1- क्या पाकिस्तान में हिंदू धर्म है?*

*2- क्या पाकिस्तान हमारा देश रहा?*

यानिकि देश भी गया और धर्म भी गया *क्यों गया??*

क्योंकि भारत की तरफ से मोहनदास गांधी जवाहरलाल नेहरू जैसे एक जमात ने धर्म छोड़कर सेकुलरिज्म अपनाया।

*जबकि जिन्ना ने सिर्फ अपने धर्म की बात कहा* देश भी माँगा और वो भी धर्म के आधार पर माँगा *खून किया सब धर्म के लिए* नतीजा उसका सिर्फ धर्म ही नहीं बचा बल्कि और बढ़ा *साथ में देश भी पाया*।

हिंदू उल्टा करते हैं *देश के नाम पर धर्म छोड़ देते हैं* धर्म छोड़ते ही कमजोर हो जाते हैं *और इनके हाथ से धर्म तो जाता ही है* देश भी निकल जाता है।

मेरा पक्ष यही है *इस सवाल पर* आपका सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है *बस सोच और दूरदृष्टि जरुरी है* अथवा पिछले 800 साल की *गुलामी की दास्तान.........🤔

🕉️ 🌞🔥🔱🐚🔔🌷

रविवार, 30 मार्च 2025

नौ दिन माता के मंत्रों का जाप कैसे करें? कैसे मन को एकाग्र करें?

🌹🚩नौ दिन माता के मंत्रों का जाप कैसे करें? कैसे मन को एकाग्र करें?


🥀 माता का निरंतर ध्यान करते हुए समस्त चर-अचर में उन्हीं की शक्ति का अनुभव करें। यह अनुभव करें कि प्रत्येक पदार्थ की तत्त्वतः रचना और उनकी शक्तियों का प्रारूप मेरे ज्ञानशक्ति को प्रकाशित कर रहे हैं। मतलब प्रत्येक पदार्थ का तत्त्वतः ज्ञान करना। चिंतन करना कि इनके मूल में क्या है, क्यों है, मुझे जैसा इसकी स्थिति या इसकी सत्ता प्रकट होती है, क्या अन्य जीवों को भी इसी प्रकार प्रकट होती है।

बस सब कुछ चिंतन है। उनकी शक्ति का आभास, अनुभव, चिंतन, अवलोकन कण-कण में करते रहना ही शक्ति की उपासना है। शक्ति की उपासना का अर्थ शक्ति के पास आसन जमाना।। शक्ति के मूल से परिचित होना। बस इसे चिंतन में निरंतर डाले रखिए, यही उनकी उपासना है।

जैसे हमें प्रत्येक क्षण यह आभास रहता है कि "मैं" हूँ। मैं भी एक तत्त्व हूँ। या मैं एक शरीर हूँ। मेरे अमुक अंग से कपड़ा अनावृत न हो जाए। वह संसार वालों को दिख न जाए। बस अगर इसी तरह अगर उनका ध्यान बना रहा तो आपकी उपासना सफल है।

यह धारणा बनाइये कि प्रकृति में बिखरी सभी शक्तियाँ मेरा शरीर ग्रहण करता चला जा रहा है।

💐यही उपासना है।

पूरे देवी भागवत, या शाक्त तंत्र, यामल तंत्र, योगिनी तंत्र, दुर्गा सप्तशती आदि में बस यही लिखा है जो मैं बता रहा हूँ।

----- कहीं कुछ नहीं है, सबका सार यही है कि

★ मैं कौन और मेरा कौन इन दो तत्त्वों को तत्त्वतः जान लिया जाए।

आगम निगम पुराण अनेका। पढ़े सुने सब कर फल एका।। तव पद पंकज प्रीति निरंतर। सब साधन कर यह फल सुंदर।।

कहीं कुछ नहीं है, यह मेरी बात मान लो सब लोग। सिर कटा लूँगा अगर कोई इससे इतर कोई बात किसी भी धर्म के किसी भी ग्रंथ में लिखी हो या अनंत शास्त्रों में जो लिखा गया हो।

यही वेदव्यास ने कहा था कि मैंने सब ग्रंथों को बार-बार मथा है और एक निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ।

आलोक्य सर्वशास्त्राणि विचार्यम च पुनः पुनः। इदमेकं सुनिष्पन्नं ध्येयो नारायणो हरि:।।

वही हरि, वही शिव, वही शक्ति, वही राम, वही कृष्ण, वही विष्णु।

बस इन्हीं का ध्यान ही, इन्हीं को जानने की बात कही है, इन्हीं का भजन करने को कहा गया है।

★★★ जँह लगि साधन वेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी।।

सब कर मत खगनायक एहा। करिय राम पद पंकज नेहा।।

कहीं कुछ नहीं है, विश्वास मानो मेरी बात को। असंख्य वेद शास्त्र पढ़ डालो, अंत में जो निष्कर्ष निकलेगा, वह यही होगा कि बस भगवान से प्रेम करना।

उसी हेतु तमाम तरीके से कर्मकांड, क्रियाकांड, ज्ञानकांड, उपासनाकाण्ड, तपकाण्ड, वैराग्यकाण्ड घुसेड़ कर एक ही बात घुमा फिराकर बताई गई है या लेकर आते हैं कि बस उनसे प्रेम कर लो।

इसी के लिए 18 पुराण बना दिए। हर तरीके से कि यह लो अगर तुम्हें तुम्हारी मम्मी नीली साड़ी में अच्छी लगती हैं तो यह पुराण लो। अगर सूट सलवार में अच्छी लगती हैं तो यह पुराण ले लो। अगर किचन में अच्छी लगती हैं तो यह पुराण ले लो। अगर dance करते अच्छी लगती हैं तो यह पुराण लो।

इसी के लिए 108 उपनिषद बना दिए। इसी के लिए एक वेद से चार भागों में फाड़ डाला। इसी के लिए एक प्रणव से वेद बना दिया। इसी के लिए एक नाद बिंदु से प्रणव बना दिया।

कहीं कुछ नहीं है, कहीं कुछ नहीं।

सर्वं खल्विदं ब्रह्म।


कैलाश चंद्र लढ़ा
"साँवरिया"
www.sanwariyaa.blogspot.com
Police Public Press, Jodhpur

आपका पूरा संदेश आपके नाम और विवरण के साथ जोड़ दिया गया है। यदि इसमें कोई और संशोधन या सुधार चाहिए हो, तो बताइए!

गुरुवार, 27 मार्च 2025

टर्म इंश्योरेंस आखिर क्यों है जरूरी, जान लीजिए इसकी पूरी ABCD

🌟 टर्म इंश्योरेंस आखिर क्यों है जरूरी, जान लीजिए इसकी पूरी ABCD 🌟

💡 Your Financial Doctor | Your FD

इन दिनों टेलीविजन पर एक एड तेजी से पॉपुलर हो रहा है, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार यमराज बनकर टर्म इंश्योरेंस के फायदे गिनाते नजर आते हैं। आमतौर पर लोग सामान्य इंश्योरेंस को ही टर्म इंश्योरेंस मानने की गलती कर बैठते हैं, लेकिन इन दोनों में बुनियादी अंतर होता है।

इस लेख के माध्यम से हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि आखिर टर्म इंश्योरेंस होता क्या है और इसके फायदे क्या हैं।


सबसे पहले जानिए कि लाइफ इंश्योरेंस के कितने प्रकार होते हैं...

  1. टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी – केवल सुरक्षा का लाभ मिलता है।
  2. एंडोमेंट पॉलिसी – सुरक्षा + निवेश का लाभ मिलता है।
  3. मनी बैक पॉलिसी – सुरक्षा + समय-समय पर रिटर्न मिलता है।
  4. यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (ULIP) – सुरक्षा + निवेश का लाभ, साथ ही बाजार के प्रदर्शन के अनुसार रिटर्न।
  5. हेल्थ इंश्योरेंस – अस्पताल में होने वाले खर्चों का कवरेज।

क्या होती है टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी?

👉 टर्म प्लान इंश्योरेंस का सबसे शुद्ध (Purest) स्वरूप होता है।
👉 इसमें बीमा लेने वाला व्यक्ति एक निश्चित समय तक प्रीमियम का भुगतान करता है।
👉 अगर निश्चित अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनी को सम एश्योर्ड (एकमुश्त राशि) मिलती है।
👉 अगर बीमा अवधि के दौरान बीमाधारक जीवित रहता है तो उसे कोई भुगतान नहीं किया जाता।
👉 टर्म प्लान आमतौर पर 10, 15, 20, 25 और 30 साल के लिए लिया जा सकता है।


🎯 उदाहरण से समझिए:

अगर आपने 15 साल के लिए ₹55 लाख का टर्म इंश्योरेंस लिया है और इसके लिए सालाना ₹4,000 का प्रीमियम भुगतान कर रहे हैं, तो:
✅ अगर 15 वर्षों के दौरान आपकी मृत्यु हो जाती है तो आपके परिवार को ₹55 लाख का भुगतान मिलेगा।
✅ अगर 15 वर्षों के बाद आप स्वस्थ रहते हैं तो कोई राशि नहीं मिलेगी।
✅ इसका मुख्य उद्देश्य परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।


✅ टर्म इंश्योरेंस प्लान के दो बड़े फायदे:

1. कम प्रीमियम में उच्च सुरक्षा

  • टर्म प्लान में प्रीमियम काफी कम होता है और कवर राशि अधिक होती है।
  • 1 करोड़ तक का कवर सालाना ₹5,000 – ₹10,000 के प्रीमियम पर मिल सकता है।

2. परिवार की वित्तीय सुरक्षा

  • बीमाधारक की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक सहारा मिलता है।
  • इससे बच्चों की शिक्षा, शादी, होम लोन आदि का खर्च आसानी से पूरा किया जा सकता है।

🔎 क्यों जरूरी है टर्म इंश्योरेंस?

✅ परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद वित्तीय संकट से बचाव के लिए।
✅ टर्म इंश्योरेंस से परिवार को एकमुश्त राशि या नियमित आय का विकल्प मिलता है।
✅ गंभीर बीमारी, आकस्मिक मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में भी कवरेज मिलता है।
✅ इससे परिवार की जीवनशैली और बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


💡 जीवन बीमा क्यों जरूरी है?

✅ अप्रत्याशित घटनाओं से बचाव।
✅ परिवार को वित्तीय सुरक्षा।
✅ कर (Tax) बचत का लाभ।
✅ सुरक्षित निवेश का विकल्प।
✅ रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का प्रावधान।
✅ बीमा पॉलिसी पर लोन की सुविधा।
✅ लाभांश या बोनस का विकल्प।


💡 अब जानिए FD और टर्म इंश्योरेंस में फर्क:


💡 Aditya Birla Life Insurance के टर्म प्लान के फायदे:

✅ बीमा राशि – ₹50 लाख से ₹5 करोड़ तक।
✅ प्रीमियम – ₹500 प्रति माह से शुरू।
✅ गंभीर बीमारी का कवरेज – ₹10 लाख तक।
✅ दुर्घटना में मृत्यु होने पर अतिरिक्त राशि।
✅ परिवार को नियमित आय का विकल्प।
✅ टैक्स बचत – धारा 80C और 10(10D) के तहत कर लाभ।
✅ प्रीमियम की राशि कम होने से आसानी से अफोर्डेबल।


💥 टर्म इंश्योरेंस के बिना परिवार को होने वाले जोखिम:

🚨 मुखिया की मृत्यु के बाद परिवार की आय का साधन बंद हो जाएगा।
🚨 बच्चों की शिक्षा और शादी में समस्या आ सकती है।
🚨 होम लोन या अन्य लोन चुकाने में परेशानी हो सकती है।
🚨 मेडिकल खर्चों के लिए बचत खत्म हो सकती है।


👉 अब देर मत कीजिए – आज ही टर्म इंश्योरेंस प्लान लें!

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कैलाश चंद्र लढ़ा
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🌟 रिटायरमेंट प्लानिंग 🌟💡 Your Financial Doctor | Your FD

🌟 रिटायरमेंट प्लानिंग 🌟

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आज इंडिया में ऐसा कोई रिटायरमेंट प्लान उपलब्ध नहीं है, जहां पर आप अपने वर्किंग पीरियड के दौरान इन्वेस्टमेंट करके अपने रिटायरमेंट के दौरान हर माह निश्चित रकम पा सकें।

इसके लिए आपको आपकी इनकम शुरू होने के साथ ही उसकी प्लानिंग शुरू करना जरूरी है। इसकी जरूरत क्यों है, ये आपको नीचे दी गई बातों से स्पष्ट हो जाएगा:

  1. पहले बैंक एफ.डी. का इंटरेस्ट रेट करीब 13% था, पोस्ट ऑफिस के सर्टिफिकेट में करीब 14%, पी.पी.एफ. में करीब 12% था, जबकि इन्फ्लेशन करीब 10% रहता था। इससे नेट इंटरेस्ट पॉजिटिव मिलता था।
  2. आज से 15 - 20 साल पहले ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी करते थे और रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन मिलती थी, जो इन्फ्लेशन के साथ बढ़ती थी।
  3. आज के समय में लाइफस्टाइल का खर्चा बहुत बढ़ गया है, जिससे कई बार आर्थिक तंगी की स्थिति आ सकती है।
  4. अगर आज किसी परिवार का मासिक खर्च ₹25,000 है, तो 6% इन्फ्लेशन को ध्यान में रखते हुए 25 साल बाद यही खर्चा करीब ₹1,12,000 हो सकता है।
  5. क्या आपको लगता है कि 25 साल बाद आपको 6% इंटरेस्ट मिलेगा? शायद नहीं! ज्यादा से ज्यादा 2% से 2.5% ही मिलेगा।
  6. ऐसे में ₹1,12,000 के मासिक खर्च के लिए आपको कम से कम ₹56,00,000 की वेल्थ की जरूरत होगी। अगर इन्फ्लेशन को भी ध्यान में लें तो यह राशि करीब ₹75,00,000 हो जाएगी।

👉 ₹75,00,000 की वेल्थ बनाने के लिए:

✅ अगर आज से 8% के इंटरेस्ट पर इन्वेस्ट करें तो हर महीने ₹8,250 इन्वेस्ट करना होगा।
✅ अगर आप 5 साल बाद शुरू करेंगे तो ₹13,200 प्रति माह इन्वेस्ट करना होगा।
✅ अगर 10 साल बाद शुरू करेंगे तो ₹22,200 प्रति माह इन्वेस्ट करना होगा।


🌟 Aditya Birla Life Insurance की Life Time Pension योजना

(विजन लाइफ इनकम प्लान)
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1 से 60 वर्ष तक के व्यक्ति इस प्लान को ले सकते हैं।
✅ बीमा 100 वर्ष की उम्र तक चलेगा।
✅ प्रीमियम 15 से 40 वर्ष तक जमा करा सकते हैं या 8, 10, 12 वर्ष की टर्म भी ले सकते हैं (जिसमें मिनिमम किश्त ₹1,00,000/- होगी)।
✅ कम से कम किश्त साल की ₹15,000/- होगी और बीमा ₹2,00,000/- का होगा।
30 वर्ष की उम्र में 25 साल के लिए इस स्कीम को लेने पर:

  • किश्त = ₹50,000/-
  • बीमा = ₹12,00,000/-
  • 25 वर्ष बाद मैच्योरिटी पर एकमुश्त ₹15,00,000/- (टैक्स फ्री) मिलेगा।
    55 वर्ष की उम्र से 100 वर्ष तक ₹1,20,000/- सालाना पेंशन मिलेगी और बीमा भी फ्री रहेगा।
    ✅ यदि पॉलिसी धारक की 55 वर्ष से पहले मृत्यु होती है तो बीमा + बोनस मिलेगा और पॉलिसी बंद हो जाएगी।
    ✅ यदि 55 से 100 वर्ष के बीच मृत्यु होती है तो ₹12,00,000/- मिलेंगे और पॉलिसी बंद हो जाएगी।
    25 वर्ष बाद गारंटीड ₹15,00,000/- और 100 वर्ष पूरे होने पर ₹12,00,000 + बोनस मिलेगा (टैक्स फ्री)।
    ✅ वर्तमान में बैंक ब्याज दर 6.25% से ज्यादा नहीं है। भविष्य में यह 2% से 3% तक रह सकती है।
    ✅ विकसित देशों में ब्याज दर आज भी 0.25% से 2% ही है, जो भारत में भी हो सकता है।
    ✅ इस पॉलिसी में 8% से 9.5% का रिटर्न मिल रहा है।
    ✅ इस प्लान से आपकी रिटायरमेंट के बाद की सभी जरूरतें पूरी होंगी
    ✅ इस पॉलिसी में 3 वर्ष बाद कभी भी सरेंडर वैल्यू का 80% तक लोन ले सकते हैं।
    ✅ इस पॉलिसी में वेवर प्रीमियम (WOP) का लाभ मिलता है।
  • अगर पॉलिसी धारक के दो अंग भंग हो जाएं या बच्चों के नाम से पॉलिसी लेने पर पिता की मृत्यु हो जाए तो आगे के सारे प्रीमियम माफ हो जाएंगे और मैच्योरिटी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

🔎 कुछ लोग सोचते हैं कि FD में ज्यादा फायदा होता है, लेकिन यह गलत है:

✅ FD सिर्फ 10 वर्ष की होती है।
✅ FD में बीमा कवर नहीं मिलता है।
✅ इस प्लान में आपको गारंटीड इनकम + बीमा + टैक्स फ्री रिटर्न मिलेगा।


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सुरक्षित भविष्य की ओर पहला कदम!

🌟 दोस्तों, Commission मिलता है, इसलिये Insurance Advisor आपकें पीछे लगते हैं ... आपकी यह धारणा बिलकुल गलत है! 🌟

🌟 दोस्तों, Commission मिलता है, इसलिये Insurance Advisor आपकें पीछे लगते हैं ... आपकी यह धारणा बिलकुल गलत है! 🌟


👉 1. क्या आप जानते हैं?
✅ अगर आप कपड़े 👕 खरीदते हैं, तो उसके मालिक को 10% से 25% तक कमीशन मिलता है, तो क्या आप कपड़े खरीदना छोड़ देते हैं?
✅ अगर आप 50 लाख का घर 🏠 खरीदते हैं, तो उस बिल्डर को 2.5 लाख मिलते हैं, तो क्या आप घर खरीदना छोड़ देते हैं?
✅ ड्राइविंग लाइसेंस 🪪 के लिए 200 रुपये लगते हैं, फिर भी आप RTO एजेंट को 2000 रुपये देते हैं...
✅ मरने के बाद सब कुछ यहीं छोड़ जाना है, यह बताने के लिए साधू महाराज 20,000 रुपये ले लेते हैं...

👉 बस इतना ही कहना है कि...
जब भी हम कुछ करते हैं, तो उसमें दूसरे को क्या मिल रहा है, इससे ज्यादा यह सोचना चाहिए कि हमें क्या फायदा मिल रहा है


🚨 Insurance Advisor पैसों के लिए आपके पीछे नहीं लगता बल्कि...

🌷 1. आपके पीछे इसलिए लगता है ताकि...
👉 आपके बाद आपकी पत्नी और बच्चों को किसी के सामने हाथ फैलाने की नौबत न आए।

🌷 2. बुढ़ापे में जब जमा पैसा खत्म हो जाए...
👉 और बच्चे भी न संभालें, तब भी आप सम्मान के साथ जी सकें

🌷 3. आपके बच्चों की पढ़ाई, शादी और भविष्य के लिए...
👉 किसी रिश्तेदार या बैंक के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

🌷 4. और सबसे महत्वपूर्ण...
👉 आज के इस महंगाई के जमाने में, एक विधवा औरत को लाचारी से बचाने के लिए।


क्या आपको पता है?

👉 अच्छी चीजें इंसान को घर-घर जाकर बेचनी पड़ती हैं, जबकि बेकार चीजों के लिए लोग खुद लाइन में लगते हैं!
👉 जैसे – दूध वाला घर-घर जाकर दूध बेचता है, लेकिन शराब के लिए लोग खुद लाइन में लगते हैं।


💡 इंसान की मृत्यु के बाद भी मदद कौन करता है?

👉 उस वक्त आपका सगा भाई भी साथ नहीं आता, लेकिन Insurance Company अपने Advisor के जरिये आपकी सहायता करने के लिए भगवान की तरह दौड़ी चली आती है!
👉 यही वजह है कि एक Insurance Advisor दिन भर घर-घर भटकता है और आपके पीछे लगा रहता है।


🌍 विकसित देशों में Insurance सरकार की तरफ से अनिवार्य है...

👉 लेकिन हमारे यहां लोगों को घर-घर जाकर समझाना पड़ता है।


💼 तो अब सोचिए और निर्णय लीजिए!

👉 आज ही अपने Insurance Advisor को बुलाएं और उचित बीमा लेकर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करें।


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🌟 Kailash Chandra Ladha
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रविवार, 23 मार्च 2025

हिन्दू चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार (30 मार्च 2025) दिन रविवार को अपना नववर्ष है।


आयो रे आयो नव वर्ष आयो
सनातन धर्म प्रेमी परिवारों से विनम्र आग्रह है कि गर्वित हिन्दू चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार (30 मार्च 2025) दिन रविवार को अपना नववर्ष है।


उस दिन ये कार्य अवश्य करें:

(01). पुरुष सफेद वस्त्र व महिलाएँ पीला या भगवा वस्त्र पहनें। भारतीय वेश धारण करें।
(02). मस्तिष्क पर उस दिन तिलक अवश्य लगायें।
(03). घर पर मिष्ठान्न बनायें।
(04). घर की छत पर भगवा झंडा अवश्य लगायें।
(05). रात्रि को घर के बाहर दीप अवश्य जलायें।
(06). घर के द्वार को सजाएँ।
(07). रंगोली बनाएँ।
(08). फूल और पत्तों के तोरण लगाएँ।
(09). कम से कम 11 लोगों को ये संदेश भेजें, और उस दिन मिलकर या फोन कॉल पर नववर्ष की शुभकामनाएँ दें और उन्हें भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।

🚩🙏 सनातन संवत् 2082 की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏🚩
नव संवत्सर आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। आइए, हम सब मिलकर इस शुभ अवसर को हर्षोल्लास के साथ मनाएं और अपनी सनातन परंपरा पर गर्व करें।
धर्म, संस्कृति और गौरव के इस पर्व को उल्लास के साथ मनाएं!

🌺 जय श्री राम! 🌺

शनिवार, 15 मार्च 2025

होली का वास्तविक स्वरूप इस पर्व का प्राचीनतम नाम *वासन्ती नव सस्येष्टि* है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है।

होली का वास्तविक स्वरूप 
इस पर्व का प्राचीनतम नाम *वासन्ती नव सस्येष्टि* है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है।
यथा–
*तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष) अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।*(भाव प्रकाश)
*अर्थात्*―तिनके की अग्नि में भुने हुए (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं। यह होलक वात-पित्त-कफ तथा श्रम के दोषों का शमन करता है।
*(ब) होलिका*―किसी भी अनाज के ऊपरी पर्त को होलिका कहते हैं-जैसे-चने का पट पर (पर्त) मटर का पट पर (पर्त), गेहूँ, जौ का गिद्दी से ऊपर वाला पर्त। इसी प्रकार चना, मटर, गेहूँ, जौ की गिदी को प्रह्लाद कहते हैं। होलिका को माता इसलिए कहते है कि वह चनादि का निर्माण करती *(माता निर्माता भवति)* यदि यह पर्त पर (होलिका) न हो तो चना, मटर रुपी प्रह्लाद का जन्म नहीं हो सकता। जब चना, मटर, गेहूँ व जौ भुनते हैं तो वह पट पर या गेहूँ, जौ की ऊपरी खोल पहले जलता है, इस प्रकार प्रह्लाद बच जाता है। उस समय प्रसन्नता से जय घोष करते हैं कि *होलिका माता की जय* अर्थात् होलिका रुपी पट पर (पर्त) ने अपने को देकर प्रह्लाद (चना-मटर) को बचा लिया।
*(स)* अधजले अन्न को होलक कहते हैं। इसी कारण इस पर्व का नाम *होलिकोत्सव* है और बसन्त ऋतुओं में नये अन्न से यज्ञ (येष्ट) करते हैं। इसलिए इस पर्व का नाम *वासन्ती नव सस्येष्टि* है। यथा―वासन्तो=वसन्त ऋतु। नव=नये। येष्टि=यज्ञ। इसका दूसरा नाम *नव सम्वतसर* है। मानव सृष्टि के आदि से आर्यों की यह परम्परा रही है कि वह नवान्न को सर्वप्रथम अग्निदेव पितरों को समर्पित करते थे। तत्पश्चात् स्वयं भोग करते थे। हमारा कृषि वर्ग दो भागों में बँटा है― *(1) वैशाखी, (2) कार्तिकी।* इसी को क्रमश: वासन्ती और शारदीय एवं *रबी और खरीफ* की फसल कहते हैं। फाल्गुन पूर्णमासी वासन्ती फसल का आरम्भ है। अब तक चना, मटर, अरहर व जौ आदि अनेक नवान्न पक चुके होते हैं। अत: परम्परानुसार पितरों देवों को समर्पित करें, कैसे सम्भव है। तो कहा गया है–
*अग्निवै देवानाम मुखं* अर्थात् अग्नि देवों–पितरों का मुख है जो अन्नादि शाकल्यादि आग में डाला जायेगा। वह सूक्ष्म होकर पितरों देवों को प्राप्त होगा।
हमारे यहाँ आर्यों में चातुर्य्यमास यज्ञ की परम्परा है। वेदज्ञों ने चातुर्य्यमास यज्ञ को वर्ष में तीन समय निश्चित किये हैं―(1) आषाढ़ मास, (2) कार्तिक मास (दीपावली) (3) फाल्गुन मास (होली) यथा *फाल्गुन्या पौर्णामास्यां चातुर्मास्यानि प्रयुञ्जीत मुखं वा एतत सम्वत् सरस्य यत् फाल्गुनी पौर्णमासी आषाढ़ी पौर्णमासी* अर्थात् फाल्गुनी पौर्णमासी, आषाढ़ी पौर्णमासी और कार्तिकी पौर्णमासी को जो यज्ञ किये जाते हैं वे चातुर्यमास कहे जाते हैं आग्रहाण या नव संस्येष्टि।
*समीक्षा*―आप प्रतिवर्ष होली जलाते हो। उसमें आखत डालते हो जो आखत हैं–वे *अक्षत का अपभ्रंश रुप हैं,* अक्षत चावलों को कहते हैं और अवधि भाषा में आखत को *आहुति* कहते हैं। कुछ भी हो चाहे आहुति हो, चाहे चावल हों, यह सब यज्ञ की प्रक्रिया है। आप जो परिक्रमा देते हैं यह भी यज्ञ की प्रक्रिया है। क्योंकि आहुति या परिक्रमा सब यज्ञ की प्रक्रिया है, सब यज्ञ में ही होती है। आपकी इस प्रक्रिया से सिद्ध हुआ कि यहाँ पर प्रतिवर्ष *सामूहिक यज्ञ* की परम्परा रही होगी इस प्रकार चारों वर्ण परस्पर मिलकर इस होली रुपी विशाल यज्ञ को सम्पन्न करते थे। आप जो गुलरियाँ बनाकर अपने-अपने घरों में होली से अग्नि लेकर उन्हें जलाते हो। यह प्रक्रिया छोटे-छोटे *हवनों की है।* सामूहिक बड़े यज्ञ से अग्नि ले जाकर अपने-अपने घरों में हवन करते थे। बाहरी वायु शुद्धि के लिए विशाल *सामूहिक यज्ञ* होते थे और घर की वायु शुद्धि के लिए छोटे-छोटे हवन करते थे दूसरा कारण यह भी था।
*ऋतु सन्धिषु रोगा जायन्ते*―अर्थात् ऋतुओं के मिलने पर रोग उत्पन्न होते हैं, उनके निवारण के लिए यह यज्ञ किये जाते थे। यह होली हेमन्त और बसन्त ऋतु का योग है। रोग निवारण के लिए *यज्ञ ही सर्वोत्तम* साधन है। अब होली प्राचीनतम वैदिक परम्परा के आधार पर समझ गये होंगे कि होली नवान्न वर्ष का प्रतीक है।
*पौराणिक मत में कथा इस प्रकार है―* होलिका हिरण्यकश्यपु नाम के राक्षस की बहिन थी। उसे यह वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यपु का *प्रह्लाद* नाम का आस्तिक पुत्र विष्णु की पूजा करता था। वह उसको कहता था कि तू विष्णु को न पूजकर मेरी पूजा किया कर। जब वह नहीं माना तो हिरण्यकश्यपु ने होलिका को आदेश दिया कि वह *प्रह्लाद को आग में लेकर बैठे।* वह प्रह्लाद को आग में गोद में लेकर बैठ गई, होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया। होलिका की स्मृति में होली का त्योहार मनाया जाता है l

मंगलवार, 4 मार्च 2025

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये उसमें *ENO* डालियेफिर *भटूरे* से फूले पेट को पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये 
उसमें *ENO* डालिये

फिर *भटूरे* से फूले पेट को 
पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये 

*जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य*
*आप कभी नहीं समझ पायेंगे*
*पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को 
*जीभ* से चाटकर कैल्शियम की 
कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी
*लेकिन*
इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं 
*विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!☺️

*पढ़ाई* के *तनाव* हमने 
*पेन्सिल* का पिछला हिस्सा 
चबाकर मिटाया था ...!!!😀

*पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती* 
और *मोरपंख* रखने से हम 
*होशियार* हो जाएंगे ...
ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था।😀

*कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां*
जमाने का *प्रयास* हमारा 
*रचनात्मक कौशल* था ...!!!☺️🙏🏻

हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते*
तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना 
हमारे जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!☺️

*माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की 
कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई* 
उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️💕
*सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के 
*कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!😀
एक *दोस्त* को *साईकिल* के 
बीच वाले *डंडे* पर और *दूसरे* को 
*पीछे कैरियर* पर *बिठा* कर 
हमने कितने रास्ते *नापें* हैं, 
यह अब याद नहीं बस कुछ 
*धुंधली* सी *स्मृतियां* हैं ...!!!💕

*स्कूल* में *पिटते* हुए और 
*मुर्गा* बनते हमारा *ईगो* 
हमें कभी *परेशान* नहीं करता था 
दरअसल हम जानते ही नही थे 
कि *ईगो* होता क्या है❓️💕

*पिटाई* हमारे *दैनिक जीवन* की 
*सहज सामान्य प्रक्रिया* थी😰😀
*पीटने वाला* और *पिटने वाला* दोनो *खुश* थे,
*पिटने वाला* इसलिए कि हम *कम पिटे*
*पीटने वाला* इसलिए *खुश* होता था 
कि *हाथ साफ़* हुआ ...!!!😀
हम अपने *माता - पिता* को कभी नहीं बता पाए 
कि हम उन्हें कितना *प्यार* करते हैं, क्योंकि 
हमें *"आई लव यू"* कहना आता ही नहीं था ...!!!
😰😀💕
आज हम *गिरते- सम्भलते*, *संघर्ष* 
करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं, 
कुछ *मंजिल* पा गये हैं तो 
कुछ न जाने *कहां खो* गए हैं ...!!!😰

हम दुनिया में कहीं भी हों 
लेकिन यह सच है, 
हमे *हकीकतों* ने *पाला* है, 
हम सच की दुनियां में थे ...!!!
😰
*कपड़ों* को *सिलवटों* से बचाए रखना
और *रिश्तों* को *औपचारिकता* से 
बनाए रखना हमें कभी आया ही नहीं ...
इस मामले में हम सदा *मूर्ख* ही रहे ...!!!
😰
अपना अपना *प्रारब्ध* झेलते हुए 
हम आज भी *ख्वाब* बुन रहे हैं, 
शायद *ख्वाब बुनना* ही 
हमें *जिन्दा* रखे है वरना 
जो *जीवन* हम *जीकर* आये हैं 
उसके सामने यह *वर्तमान* कुछ भी नहीं ...!!!
😰
हम *अच्छे* थे या *बुरे* थे 
पर हम सब साथ थे *काश* 
वो समय फिर लौट आए ...!!!
😰😰
"एक बार फिर अपने *बचपन* के *पन्नो* 
को पलटिये, सच में फिर से जी उठेंगे”...💕
  
और अंत में ...

हमारे *पिताजी* के समय में *दादाजी* गाते थे ...

*मेरा नाम करेगा रोशन*
*जग में मेरा राज दुलारा*💕

हमारे *ज़माने* में हमने गाया ...

*पापा कहते है बड़ा नाम करेगा*💕

अब *हमारे बच्चे* गा रहे हैं …

*बापू सेहत के लिए ...*
*तू तो हानिकारक है*। 😰😰

*सही* में हम 
*कहाँ से कहाँ* आ गए ...???😰

एक बार मुड़ कर देखिये ...
और 
मुस्कुरा दीजिए 
क्योंकि ......
*Change is part of life.*
*Accept it gracefully.*
           🙏😊😊🙏

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