बुधवार, 10 अगस्त 2011

इंतज़ार ही करते रहोगे क्या ?


जय श्री कृष्णा

दोस्तों
इंतज़ार ही करते रहोगे क्या ?

आप सोच रहे होंगे कि मैं ये क्या कह रहा हूँ ? मैं तो एक साधारण आम नागरिक हूँ पर आम जनता कि तरह सोचना मेरे बस में नहीं है मुझे तो देश का हर नागरिक क्या सोच रहा है और देश में क्या हो रहा है इसकी फिकर है
पूरा देश आज महंगाई और भ्रष्टाचार की आग में जल रहा है, हर कोई इसे महसूस भी कर रहा है कि देश में भ्रष्टाचार कितना बढ़ गया है नोकरशाही में तो भ्रष्टाचार का बोलबाला था ही अब तो देश के कई दिग्गज नेता, और साधू संत भी इसी राह में अपना उल्लू सीधा करते जा रहे है सारे देश कि जनता को पता है कि कोंन कितना सच्चा और ईमानदार है और कौन बेईमान है |
तो फिर आँखे बंद कर के क्यों बेठे हो ?
क्या कोई ऊपर से आएगा तुम्हारे देश को सुधारने के लिए ?
या मैं ये मान लूँ कि " जिनके घर शीशे के हुआ करते हैं वो दूसरों के घरों में पत्थर नहीं मारा करते "
कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा भाइयों अब या तो खुद ही अपने स्तर भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए अभियान चलाओ और शुरुआत स्वयं से ही कर लो मैं ये नहीं कहता कि आप स्वयं भी भ्रष्टाचार में लिप्त हो किन्तु अगर लिप्त नहीं हो तो भ्रष्टाचार को सहन क्यों कर रहे हो ? उसे बढ़ावा क्यों दे रहे हो ? या हिम्मत नहीं कर पा रहे हो | या भगवान के आने का इंतज़ार कर रहे हो (वो गीत नहीं सुना क्या " भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है, तेरी मुठ्ठियों में बंद तूफ़ान है रे")
अब क्या कृष्ण भगवान कि तरह गीता का उपदेश देना पड़ेगा क्या ? ( वेसे भी आजकल टीवी के सारे सीरियल तो उलटी बाते ही सिखाते है )
कोई नहीं आएगा दोस्तों, मुझे पता है कि कोई भी कुछ अच्छा कार्य करने लगता है तो सबसे पहले टांग अडाने वाले ज्यादा आगे आते है
फिर भी " हे जोश अगर नन्हे परिंदे के जिगर में , फिर आसमां ना पार हो एसा नहीं होता"
अब तो कुछ ना कुछ करना ही होगा दोस्तों
पानी सर से ऊपर निकल गया है सभी लोग मनमानी कर रहे है, देश को बचाने कि बजाय खुद की जेबे भर रहे है और जनता पर महंगाई और आश्वासन का उपहार दे रहे है, इसे तो देश का कल्याण नहीं हो सकता | जो लोग रिश्वत ले रहे है वो तो गुनेहगार है है पर उससे ज्यादा गुनेहगार तो वे लोग है ना जो उनको रिश्वत दे रहे हैं |
बंद करो भ्रष्टाचार, अत्याचार | इसके लिए आप सभी को एक होना पड़ेगा, क्योंकि जहाँ पर एकता नहीं होती वही पर आसानी से राज किया जा सकता है | सभी भाइयों को पहले अपने देश के बारे में, फिर अपने राज्य के बारे में, फिर अपने शहर, समाज और घर के बारे में सोचना होगा| तभी भारत फिर से विश्व गुरु बन पायेगा
स्वार्थी मत बनो | देश के लिए कुछ एसा करो की इतिहास बदल जाये.

"Here are two kind of people in this world,
1. Those who remember " names"
2. Those whose "names" are remembered
"Choice is yours"

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