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सोमवार, 9 अगस्त 2021

कहानी धारा 370 और 35 A के हटने की (Behind the scenes)

 कहानी धारा 370 और 35 A के हटने की (Behind the scenes)



4 अगस्त 2019 का दिन था, पार्लियामेंट्री काम्प्लेक्स में जबरदस्त हलचल थी, गृह मंत्री ने एक Confidential और High-level की मीटिंग बुलाई थी, जिसमे NSA अजीत डोभाल, होम सेक्रेट्री, RAW और IB के चीफ को बुलाया गया था.


मीटिंग की शुरुआत हुई थी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 अगस्त 2019 को दिए गए एक statement से, जिसमे उन्होंने कहा था कि वो भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं.......इस statement के कई strategic और Diplomatic मायने थे....क्योंकि एकाएक अमेरिका का कश्मीर मुद्दे पर बोलना शाह और डोभाल को नही पच रहा था।


IB और RAW चीफ से कुछ जरूरी बातें की गई, और फिर मीटिंग खत्म हो गयी।


मीडिया में और सोशल मीडिया में पिछले 3-4 दिनों से हल्ला मचा हुआ था, कि 'कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है'


अगले दिन, 5 अगस्त 2019 को सुबह 9:30 बजे CCS (कैबिनेट कमिटी of सिक्योरिटी) की बैठक प्रधानमंत्री निवास पर हुई......उसके बाद करीब 10:30 बजे गृह मंत्री वहां से संसद के लिए निकले.......मीडिया और विपक्ष को लग रहा था कि लोकसभा में कुछ होगा, लेकिन अमित शाह Brown कलर की जैकेट पहने राज्य सभा में प्रविष्ट हुए.....किसी को पता नही था कि आज क्या होने वाला है.


और फिर लगभग 11 बजे अमित शाह खड़े हुए, और उन्होंने पहले तो धारा 370 और 35 A के विवादित हिस्सो को खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया, और उसके बाद उन्होंने जम्मू और कश्मीर राज्य को 2 नए केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का प्रस्ताव भी पेश कर दिया।


विपक्ष, मीडिया और यहां तक कि सरकार के समर्थकों को समझ नही आया कि ये हुआ क्या। विपक्ष ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया, वहीं कुछ experts ने इस कदम को Knee Jerk रिएक्शन या बिना तैयारी के लिया गया कदम बताया.......लेकिन 5 अगस्त 2019 को जो हुआ, उसकी तैयारी पिछले कई सालों से चल रही थी.......आज हम इसकी तैयारी की बात करेंगे, क्या हुआ, कैसे हुआ, किसने किया.....सब जानेंगे।



जम्मू कश्मीर आजादी के बाद से ही हमारे लिए परेशानी का कारण रहा है, युद्ध भी कश्मीर के कारण ही हुए, उसके बाद आतंकवाद का कारण भी यही क्षेत्र ही रहा है। जम्मू कश्मीर में 2 ही परिवारों का राज चला है, मुफ़्ती और अब्दुल्लाह..... इनके अलावा कांग्रेस ने भी सत्ता हासिल की, लेकिन उनका प्रभाव बहुत ज्यादा नही रहा। इन सभी पार्टियों ने एक अनकहा सा सिस्टम बना रखा था, कि कोई बाहर की पार्टी राज्य में फलफूल नही सकती थी, हर बार सत्ता में यही लोग जोड़ तोड़ करके आ जाते थे। कश्मीर घाटी के पास ज्यादा सीट होती हैं, इसलिए जो कश्मीर जीत जाता था, शासन उसी का चलता था।


लेकिन ये सब बदलने वाला था, और बदलाव शुरू हुआ 1 मार्च 2015 को....जब चुनावो के बाद बीजेपी और पीडीपी एक साथ आये और सरकार बनाई गयी.....धारा 370 हटाने की बुनियाद जोरावर सिंह स्टेडियम में उस दिन पड़ी, जब महेबुबा मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, और वहीं साथ मे प्रधानमंत्री मोदी भी बैठे थे।


दोनों आपस मे गले लगे, और इसी के साथ बीजेपी का विरोध भी शुरू हो गया, खासकर उन्ही के समर्थकों द्वारा। जाहिर भी था कि पीडीपी एक ऐसी पार्टी है जिसको पाकिस्तान को ले कर थोड़ा सॉफ्ट stand रहा है, आतंकवाद फैलाने वाले लोगो को support करना भी इन्ही लोगो का काम था।


लेकिन कुछ तो बदलाव अब आने लगा था, जम्मू कश्मीर में बीजेपी की एंट्री के साथ ही कुछ काम ऐसे हुए, जिसकी वजह से 5 अगस्त 2019 वाला बड़ा काम हुआ।


सबसे पहला काम हुआ था 2016-2017 के बीच NIA की कश्मीर घाटी में धुंआधार एंट्री। NIA ने कश्मीरी अलगाववादियों और आतंकी समर्थकों, Over Ground workers की फंडिंग के स्रोतों पर प्रहार किया, और साथ ही दशकों से कश्मीर में चल रहे हवाला पर चोट करनी शुरू की।


सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेज को खुली छूट दे दी गयी थी, आतंकियों के खिलाफ एक्शन लेने की....अगर आप डेटा देखेंगे तो पाएंगे कि सेना ने काफी encounters किये और नित नए तरीकों से आतंकियों को मारना शुरू किया।


राम माधव के नेतृत्व में आरएसएस ने भी कश्मीर में जगह बनाना शुरू कर दिया था, धीरे धीरे ही सही, लेकिन उनका connect आम जनता से होने लगा था। आरएसएस ने पंचायत के स्तर पर काम किया, जिसका फायदा आगे आने वाले पंचायत चुनावों में दिखा।


इन सब घटनाओं से पीडीपी और बीजेपी के बीच दरार आने लगी, इसी बीच कांग्रेस और NCP ने भी पीडीपी के साथ सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी। अब अगर ऐसी कोई सरकार बन जाती, तो बीजेपी फिर से system से बाहर हो जाती, और धारा 370 हटाने का ख्वाब कभी पूरा नही होता।


असल खेल 20 जून 2018 को हुआ, जब गवर्नर वोहरा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा कर दी। विपक्षी पार्टियां अवाक थी, हैरान थी।


उसके बाद कुछ Key Positions पर appointments किये गए, BVR सुब्रमनियम को Chief सेक्रेटरी बना दिया गया....नक्सल एक्सपर्ट विजय कुमार और जम्मू कश्मीर के पूर्व चीफ सेक्रेट्री BB व्यास को राज्यपाल का सलाहकार बना दिया गया। इसके बाद सत्यपाल मलिक को जम्मू कश्मीर का नया राज्यपाल बना दिया गया। ये सारी appointments ऐसे ही हवाबाजी में नही हुई थी।


इसी दौरान रमजान पर ceasefire नही लगाया गया और जम कर आतंकियों का सफाया किया गया। हजारो की संख्या में पैरामिलिट्री फोर्सेज कश्मीर घाटी में भेजी गई, यहां तक कि NSG को भी सिक्योरिटी Grid का हिस्सा बना कर भेजा गया, ट्रेनिंग के नाम पर।


अक्टूबर 2018 में ही J&K बैंक पर एक्शन शुरू हुआ, जहां भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ी के काफी सबूत भी मिले। महबूबा मुफ्ती को भी नोटिस थमाया गया।


तैयारी चल रही थी, और विपक्ष को भी इसकी भनक थी कि कश्मीर पर कुछ बड़ा कदम 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उठाया जा सकता है। इसकी बाकायदा तैयारी भी शुरू हो गयी थी, और सरकार के कुछ मंत्री और उच्च अधिकारियों को एक ड्राफ्ट बनाने का काम दिया गया था, ये ड्राफ्ट धारा 370 और 35 A हटाने के लिए ही था।


लेकिन उससे ठीक पहले 14 फरवरी को पुलवामा हमला हुआ, और पूरा dynamics ही बदल गया कश्मीर का। हमारे जवानों की हत्या हुई थी, और सरकार पर दबाव था इसका बदला लेने की। इसके बदले में बालाकोट पर हमला किया गया, और 1971 के बाद पहली बार हमारी एयरफोर्स ने LOC और इंटरनेशनल बॉर्डर पार किया।


बालाकोट के बाद बदली हुई स्थिति में सरकार ने इस ड्राफ्ट को वहीं रोकने का मन बनाया और चुनावो में बेहतर सीट्स जीतने के बाद इस मुद्दे पर कोई एक्शन लेने का सोचा।


2019 में बेहतर जनादेश के साथ फिर से मोदी प्रधानमंत्री बने, और इस बार अमित शाह को गृह मंत्री बनाया गया था, जैसे किसी खास मिशन को अंजाम देना हो।


जून महीने में ही 5 teams का निर्माण किया गया, पुराने ड्राफ्ट पर फिर से काम शुरू हुआ.....आपको जानना चाहिए कि इस खास टीम में आख़िर थे कौन लोग


पहली टीम थी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री की, इसमे प्रधानमंत्री कैप्टेन थे, वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमित शाह इस टीम के खास मेंबर थे। इस टीम में जो भी निर्णय होते थे, उसके बारे में बस इन तीनो को ही पता होता था।


दूसरी Political टीम बनाई गई, इसमे 6 अन्य नेता, जिनमे पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, प्रह्लाद जोशी, जितेंद्र कुमार और हेमंत बिश्वा सरमा थे, जिनका काम था विपक्ष को साधना और ऐसी किसी स्थिति में राज्यसभा में बहुमत का जुगाड़ करना, क्योंकि अभी भी राज्यसभा में बीजेपी या NDA के पास simple मेजोरिटी नही थी। इन नेताओं को 5 अगस्त की सुबह 10:30 बजे ही पता लगा कि आज ही ये कानून राज्यसभा में लाया जाएगा......such was the secrecy 😊😊


तीसरी थी एक Executive टीम, जिसका काम था कानून में बदलाव करने का और On-ground repurcusions को साधने का....इस टीम के मेंबर्स थे NSA डोभाल, RAW चीफ समंत गोयल, IB डारेक्टर अरविंद कुमार, होम सेक्रेट्री राजीव गौबा, ज्ञानेश कुमार (एडिशनल सेक्रेट्री-जम्मू और कश्मीर प्रभार).....इन सभी अफसरों का काम था law and order व्यवस्था को संभालना, पाकिस्तान या चीन की तरफ से होने वाले किसी कदम को रोकना, आतंकवादी घटनाओं पर लगाम लगाना, Logistics support देना, और जम्मू कश्मीर की हर जरूरत को पूरा करना।


चौथी थी Legal टीम, इसमे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल, Law and Justice सेक्रेट्री आलोक श्रीवास्तव, और एडिशनल सेक्रेटरी (law) RS Verma थे। इनके अलावा कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इस टीम के कानूनी सलाहकार थे, इस टीम का काम था, कानूनी रूप से मजबूत ड्राफ्ट बनाना, ताकि उसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी हटाया ना जा सके। इस टीम ने जून और जुलाई के दौरान अनगिनत मीटिंग की होंगी, घंटो घंटो एक एक लाइन, एक एक शब्द पर मंथन किया, और final draft बना कर तैयार किया। इस टीम का काम मुख्यतः 370 और 35 A हटाने के बाद होने वाले कानूनी backlash से लड़ने का था, क्योंकि विपक्ष के पास वकीलों की भीड़ थी, साथ ही Judiciary में भी कुछ लोग थे जो ऐसे किसी भी मामले में तुरंत दखल दे सकते थे।


पांचवी और आखिरी टीम थी विदेश मंत्रालय की, जिसमे विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन थे। इनका काम था दुनिया को इस बदलाव के बारे में बताना, भारत का पक्ष रखना, और किसी भी तरह के डिप्लोमेटिक Assault को ध्वस्त करना।


मई में सरकार बनने के बाद, NSA डोभाल ने कश्मीर घाटी के कई चक्कर लगा लिए थे, और तमाम तरह के inputs उनके पास थे। सरकार ने प्लान किया था कि इस कानून को अगले सत्र में लाया जाएगा, लेकिन उसी बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कुछ बयान आ चुके थे, जिस वजह से सरकार को लग रहा था कि कहीं जल्दी ना करना पड़े। इसी वजह से 25 जुलाई को मानसून सेशन को 7 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश भी दे दिया गया.....लेकिन अभी तक ये निश्चित नही था कि हम ये करने ही वाले हैं।


2 अगस्त के दिन बड़ा महत्वपूर्ण था, क्योंकि ट्रम्प ने अप्रत्याशित रूप से कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात की, ये बात भारतीय सरकार और इंटेलिजेंस एजेंसीयों के गले नही उतर रही थी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की एक कॉल होती है, और Go-Ahead मिल जाता है।


पांचों टीम सक्रिय हो चुकी थी, अमित शाह का War Room बनाया गया था पार्लियामेंट आफिस में, जहां से वे PMO और सॉलिसिटर जनरल के साथ 24*7 Open लाइन पर थे। 


जम्मू कश्मीर की तत्कालीन प्रिंसिपल सेक्रेटरी (होम) शालीन काबरा से गृह मंत्रालय की बात हुई और तुरंत अमरनाथ यात्रा पर रोक लगा दी गयी, सभी यात्रियों को तुरंत वापस लौटने को कहा गया। सिविल सर्विस और सेना को यात्रियों की मदद को कहा गया।


LOC और इंटरनेशनल बॉर्डर पर सेना और अन्य अर्धसैनिक बलों को High अलर्ट पर रहने को कहा गया, कई टुकड़ियां कश्मीर घाटी के sensitive इलाको में पोजीशन ले चुकी थी। इसके साथ ही LOC पर बड़े हथियारों की positioning भी की जा रही थी, उत्तर भारत के सभी एयरफोर्स स्टेशन्स high अलर्ट पर थे, वहीं नेवी के कई युद्ध पोत अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पोज़िशन्स ले चुके थे। एक तरह से युद्ध के लिए सेना तैयार थी।


2 अगस्त को गृह मंत्रालय और PMO सुबह 3 बजे तक काम करते रहे। यही प्रक्रिया 3 और 4 अगस्त को भी दोहराई गयी। और शुक्रवार को ये संदेश काफी महत्वपूर्ण लोगो को दिया जा चुका था कि 5th August is the Day.


बीजेपी लीडरशिप को कहा गया कि 3 और 4 अगस्त को सभी MP की ट्रेनिंग कराई जाए, कि ऐसे किसी बदलाव के बाद संसद में, मीडिया के सामने और सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर क्या बोलना है, कैसे पक्ष रखना है, और ये ट्रेनिंग हुई भी, जिसमे कुछ महत्वपूर्ण MP ने भाग भी लिया।


शुक्रवार के अमरनाथ यात्रा को रोकने के आदेश के बाद सोशल मीडिया में माहौल गर्म हो चुका था। सभी को अंदेशा हो चुका था कि कुछ तो होने वाला है, अलग अलग तरह की theories और मास्टरस्ट्रोक वाली कहानियां सामने आ रही थी।


संडे 4 अगस्त की रात को सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया, और फ़ोन पर प्रधानमंत्री, अमित शाह और अजित डोभाल की बात हुई, और अगले दिन सुबह CCS की मीटिंग के बाद इस बिल को राज्य सभा मे पेश करने पर सहमति बनी.....क्योंकि Team No. 2 ने बता दिया था कि Opposition को मैनेज कर लिया गया है....अब बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, लोकसभा में तो पूर्ण बहुमत है ही।


4 अगस्त की रात विदेश मंत्रालय के लिए भी कठिन थी, पूरी रात communication draft पर काम हुआ, दुनिया के हर देश की सरकार से संपर्क की तैयारी कर ली गयी थी। कुछ बड़े देशो की सरकारों को इत्तिला दे दी गयी थी, कि हम एक खास एक्शन लेने वाले हैं, और समर्थन का आश्वासन भी ले लिया गया था।


CCS की मीटिंग के बाद अमित शाह राज्यसभा पहुँचे, और 11 बजे के आस पास उन्होंने ऐतिहासिक भाषण दे कर इन प्रावधानों को हमेशा के लिए बदल दिया, और इस 70 साल पुरानी बीमारी को खत्म कर दिया।


जैसे ही अमित शाह ने इस मुद्दे पर भाषण देना शुरू किया, विदेश मंत्रालय हरकत में आया, और सभी देशों को Communication भेजे जाने लगे। बड़े देशो को बाकायदा कॉल्स करके सूचित किया गया, इस कानून के हर पहलू पर जानकारी दी गयी, ताकि किसी भी तरह के डिप्लोमेटिक Backlash से खत्म किया जाए।


वहीं टीम 3 को आदेश दिए गए, जम्मू कश्मीर में इंटरनेट पर रोक लगाई गई, धारा 144 लागू की गई, अजित डोभाल कुछ दिनों के लिए कश्मीर घाटी में ही रहे। सर्दियों की तैयारी कर ली गयी, logistics, rationing आदि के लिए तैयारी शुरू कर दी गयी थी। वहीं पोलिटिकल लीडर्स को गिरफ्तार किया जाने लगा, जिन लोगो से दंगे फसाद का खतरा था, उन्हें गिरफ्तार कर के हरियाणा और उत्तर प्रदेश की जेल में डाल दिया गया....इसी वजह से 5 अगस्त के बाद कश्मीर घाटी में कोई हो हल्ला नही मचा।


वहीं Team 5 के प्रयास भी रंग लाये, क्योंकि सभी बड़े देशो, UN के 5 परमानेंट मेंबर्स, NATO देश, यूरोपियन यूनियन के देश, OIC और अन्य इस्लामिक देशो ने भी इस मामले पर भारत या तो समर्थन किया, या फिर चुप रहे।


टीम 4 की कानूनी तैयारी इतनी पुख्ता थी, कि इस कानून के खिलाफ कोई कुछ नही कर पाया, ज्यूडिशरी तक इस कानून में कोई कमी नही ढूंढ पाई।


टीम 2, जिसका काम था पोलिटिकल सपोर्ट लेने का, उसने बेहतरीन काम किया, और कुछ पार्टियों को छोड़ कर लगभग हर पार्टी ने इन बिल के समर्थन में वोट किया। यहां तक कि आम आदमी पार्टी तक की हिम्मत नही हुई इनका विरोध करने की 😊


तो ये तैयारी थी धारा 370 और 35 A को हटाने की, ये कोई knee jerk reaction नही था, जो रातों रात लिया गया, इसके पीछे बहुत बड़ी प्लानिंग थी, जिसे मूर्त रूप लेने में 3-4 साल लगे, इस बीच मे प्रधानमंत्री पर भी सवाल उठाए गए, पीडीपी के साथ सरकार बनाने पर भी सवाल उठे, लेकिन उन्हें पहले दिन से पता था कि इस समस्या को कैसे खत्म करना है, और उन्होंने वही किया भी।


अब इसे कूटनीति कहो, मास्टरस्ट्रोक कहो या कुछ और कहो, लेकिन एक बात तो तय है, कि इतने precision से प्लानिंग करने और उसको execute करना सिर्फ मोदी के बस की बात थी.....वरना पिछले 70 सालों में किसी की हिम्मत क्यों नही हुई ये करने की??? वाजिब सवाल है।


इस पोस्ट में लिखी बातें कोई कपोल कल्पना नही है, 2015 से 2019 के बीच की हजारो खबरो का निचोड़ है, आप भी रिसर्च कर के ये सभी जानकारियां ले सकते हैं।

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