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सोमवार, 2 जून 2025

चौंकाने वाला खुलासा: मेडिकल सिस्टम की पोल खुली


 चौंकाने वाला खुलासा: मेडिकल सिस्टम की पोल खुली

🚨हाल ही में दो साहसी न्यूज़ रिपोर्टर्स ने हमारे हेल्थकेयर सिस्टम की सच्चाई सामने लाने के लिए एक साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सीने में दर्द का नाटक करते हुए एक अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। हैरानी की बात यह रही कि उन्हें पूरे एक हफ्ते तक अस्पताल में रखा गया, बिना किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि के। इस दौरान एक रिपोर्टर तो बेहोश तक हो गया, अत्यधिक तनाव और अनावश्यक उपचारों के कारण।
यह घटना यह साफ़ दर्शाती है कि आज का मेडिकल सिस्टम पैसे की भूख में इंसानियत को भूल चुका है। जब स्वास्थ्य एक व्यापार बन जाए, तो भरोसा खो जाता है। अब वक्त आ गया है कि हम अपनी सेहत की ज़िम्मेदारी खुद उठाएँ।
हम सभी से आग्रह करते हैं कि अब जागरूक होकर कदम उठाएँ। एक सकारात्मक पहल यह हो सकती है कि आप अपने जीवन में कैंजेन वॉटर (Kangen Water) को शामिल करें। यह पानी अपनी शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट क्षमता और प्राकृतिक तरीके से शरीर को डिटॉक्स और हाइड्रेट करने के लिए जाना जाता है।
🛑 किसी मेडिकल इमरजेंसी के इंतज़ार में मत रहिए।
💧 जागरूक बनिए। स्वस्थ रहिए। समझदारी से चुनिए।
Change Your Water 💦 Change Your Life 🧬
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घर बनाने में क्या इस्तेमाल किया जाये कि घर की लागत कम हो सके?

 

"सुनिए साहब, घर बनाना है तो पैसा सोच-समझकर लगाइए!"

देखिए, मैं ठेकेदारी करता हूँ, लेकिन ईमानदारी से काम करता हूँ। आपका पैसा मेरी जिम्मेदारी है, और मैं चाहता हूँ कि हर रुपया सही जगह लगे। कई लोग घर बनवाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिनसे लाखों का नुकसान हो जाता है। मैं आपको वो बातें बताने वाला हूँ, जो आमतौर पर ठेकेदार आपको नहीं बताते।

घर का डिजाइन जितना सीधा-सपाट होगा, उतना सस्ता पड़ेगा। ज्यादा कोने, ज्यादा घुमाव-फिराव, या बेवजह की डिजाइनिंग से मटेरियल और मजदूरी दोनों बढ़ती हैं। एक सिंपल चौकोर या आयताकार घर सबसे किफायती होता है। बेवजह के एक्स्ट्रा कमरे बनाने से बचिए, जैसे स्टोर रूम, पूजा रूम, अलग से ड्रॉइंग रूम – ये बाद में कम ही काम आते हैं, लेकिन खर्चा बहुत करवा देते हैं।

अब नींव की बात करें तो लोग सोचते हैं कि "नींव जितनी गहरी, घर उतना मजबूत।" लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता। सबसे पहले मिट्टी की जांच करवाइए। अगर मिट्टी अच्छी है, तो बेवजह 10-12 फीट खुदाई करवाने का कोई मतलब नहीं। ज्यादा खुदाई मतलब ज्यादा सीमेंट, ज्यादा ईंट और ज्यादा पैसा।

ईंटों में ब्रांड मत देखिए, मजबूती देखिए। लोकल ईंटें भी कई बार ब्रांडेड से बेहतर होती हैं। एक ईंट को ज़मीन पर गिराकर देखिए – अगर वो नहीं टूटती, तो वही सही है। फ्लाई ऐश ब्रिक्स और कंक्रीट ब्लॉक भी एक बेहतरीन ऑप्शन हैं – ये सस्ते भी पड़ते हैं और गर्मी भी कम करते हैं।

सीमेंट और सरिया खरीदने में सबसे ज्यादा ठगी होती है। ठेकेदार कहेगा कि "सिर्फ 53 ग्रेड का सीमेंट ही लेना है" – लेकिन हर जगह इसकी जरूरत नहीं होती। ईंट जोड़ने और प्लास्टर के लिए 43 ग्रेड सीमेंट भी बढ़िया काम करता है और सस्ता पड़ता है। सरिया भी लोकल ब्रांड का बढ़िया मिलता है, बस भरोसेमंद दुकान से लीजिए।

छत की मोटाई उतनी ही रखिए, जितनी जरूरी हो। कई लोग कहते हैं कि "छत भारी होगी तो घर मजबूत बनेगा", लेकिन बेवजह मोटा कंक्रीट डालकर खर्चा मत बढ़ाइए। अगर घर ठंडा रखना है, तो छत पर सफेद टाइल्स लगवा सकते हैं – इससे गर्मी अंदर नहीं आएगी और AC-कूलर का खर्च भी कम होगा।

दरवाजे और खिड़कियों में लकड़ी की बजाय UPVC या WPC लगवाइए। ये सस्ते भी पड़ते हैं, टिकाऊ भी होते हैं और दीमक-बरसात से खराब नहीं होते। लकड़ी महंगी भी आती है और मेंटेनेंस भी ज्यादा मांगती है।

प्लास्टर और पेंटिंग में भी बहुत पैसा फिजूल चला जाता है। महंगा POP और फॉल्स सीलिंग करवाने से बचिए – ये देखने में अच्छा लगता है, लेकिन साल-दो साल में धूल जमा होने लगती है और सफाई का झंझट बढ़ जाता है। अगर बजट कंट्रोल करना है, तो सिंपल पेंट और अच्छे क्वालिटी की टाइल्स पर फोकस करें।

अब सबसे बड़ी बात – मजदूरी और ठेकेदारी। डेली मजदूरी में ठेकेदार अक्सर काम धीरे करवाएगा ताकि पैसे ज्यादा निकलवाए जा सकें। हमेशा फिक्स ठेका लीजिए – इससे काम जल्दी और सही तरीके से होगा। और हाँ, अगर आप थोड़ी मेहनत खुद कर सकते हैं, तो बहुत पैसा बच सकता है। पेंटिंग, तराई,हल्का फुल्का काम, दरवाजों की पॉलिशिंग – ये सब खुद करने से हजारों रुपये बच सकते हैं।

सरकारी स्कीमों का भी फायदा उठाइए। अगर आप प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी किसी स्कीम के पात्र हैं, तो लोन सस्ता मिल सकता है। मटेरियल हमेशा होलसेल में खरीदिए – वहाँ बड़ा डिस्काउंट मिलता है। और अगर कंस्ट्रक्शन ठंड या बारिश के मौसम में करवाएँगे, तो मजदूरी भी सस्ती मिलेगी और मटेरियल भी कम दाम में मिल सकता है।

घर बनाना जिंदगी का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होता है, और अगर थोड़ी समझदारी से काम लेंगे, तो लाखों रुपये बच सकते हैं। मेरा तो काम ठेकेदारी करना है, लेकिन मुझे खुशी होगी अगर आपका घर मजबूत भी बने और बेवजह पैसे की बर्बादी भी न हो।

ज्योतिषीय तरीकों से यह अनुमान लगाने की कोशिश करते थे कि गर्भ में लड़का है या लड़की

 

लड़का होगा या लड़की, जानने के लिए 3500 साल पहले अपनाया जाता था ये तरीका..जानिए..,.

आजकल तो अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक तकनीकों से बच्चे के लिंग का पता लगाया जा सकता है (हालाँकि कई देशों में यह गैरकानूनी है, जैसे भारत में)। लेकिन 3500 साल पहले जब विज्ञान इतना विकसित नहीं था, तब लोग पारंपरिक और ज्योतिषीय तरीकों से यह अनुमान लगाने की कोशिश करते थे कि गर्भ में लड़का है या लड़की।

3500 साल पुराने एक तरीके के बारे में कहा जाता है कि:

मिस्र और बेबीलोन सभ्यताओं में एक तरीका प्रचलित था—गेहूं और जौ का अंकुरण परीक्षण (Wheat and Barley Test)। इसका तरीका कुछ इस प्रकार था:

गर्भवती महिला का मूत्र गेहूं और जौ के बीजों पर डाला जाता था।

यदि गेहूं पहले अंकुरित होता, तो माना जाता था कि लड़की होगी।

यदि जौ पहले अंकुरित होता, तो माना जाता था कि लड़का होगा।

यदि कोई अंकुरण न हो, तो गर्भवती न होने की संभावना मानी जाती थी।

रोचक बात यह है कि 20वीं सदी में कुछ वैज्ञानिकों ने इस परीक्षण को दोहराया और पाया कि इसमें कुछ हद तक सटीकता हो सकती है क्योंकि मूत्र में मौजूद हार्मोन बीजों की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।

हालाँकि, आज के विज्ञान के अनुसार यह तरीका पूरी तरह विश्वसनीय नहीं है। यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से दिलचस्प ज़रूर है, लेकिन बच्चे का लिंग जानने के लिए आधुनिक चिकित्सा ही सही और सुरक्षित रास्ता है—वो भी तब, जब कानूनी रूप से अनुमति हो।

अगर चाहो तो और भी पुराने या अनोखे तरीकों के बारे में बता सकता हूँ।

जो लोग सीज फायर का विरोध कर रहे है उनका कोई बच्चा फौज में लड़ाई में नहीं है।

 जब द्रौपदी के पांचों लड़के महाभारत के युद्ध में मार दिए गए, तब उनको समझ में आया कि युद्ध क्या होता है। उसके पहले वह युद्ध के लिए सबसे अधिक लालायित थीं, सबसे अधिक युद्ध के लिए पांडवों को ललकारती थीं- कृष्ण के युद्ध रोकने के हर प्रयास का सबसे अधिक विरोध द्रौपदी करती थीं।

महाभारत युद्ध को हर कीमत पर रोकने के लिए कृष्ण सभी तरह का प्रयास कर रहे थे, जो लोग कृष्ण के युद्ध रोकने के प्रयासों का सबसे अधिक विरोध कर रहे थे, उसमें द्रौपदी पहले नंबर थीं। 

जब युद्ध रोकने या समझौते की कोई बात शुरू होती, वह कहती कि मेरे इन खुले बालों का क्या होगा? जो दुशासन के रक्त के प्यासे हैं, वह कहती भीम की उस प्रतिज्ञा का क्या होगा, जो उन्होंने दुर्योधन की जंघा तोड़ने के लिए लिया है। उस कर्ण को मैं जीवित कैसे देख सकती हूं, जिसने मुझे वेश्या कहा। 

कृष्ण हर बार उन्हें डांटते हुए कहते कि तुम्हारे खुले बालों , तुम्हारे बदले की भावना , दुशासन के रक्त, तुम्हारे मन की शांति के लिए दुर्योधन की टूटी जंघा और कर्ण की हत्या तक युद्ध सीमित नहीं है। 

अगर यह युद्ध हुआ, तो लाखों निर्दोष लोग मारे जाएंगे, लाखों बच्चे अनाथ होंगे, लाखों महिलाएं विधवा और लाखों मांओं की गोद सूनी हो जाएगी। 

युद्ध में मारे जाने वाले और अपने को खोने वाले वे लोग होंगे, जिनका कुछ भी इस युद्ध में दांव नहीं लगा है। चाहे वे पांडव की सेना में हों या कौरव की सेना में उनका कोई हित-अहित या लाभ-हानि इस युद्ध से नहीं जुड़ा हुआ है। वे सिर्फ सैनिक के तौर पर अपनी रोजी-रोटी या वफादारी साबित करने के लिए इस या उस पक्ष में युद्ध में शामिल होंगे। 

मुझे तुम्हारे निजी बदले की भावना की नहीं, उन लोगों की चिंता है, बिना किसी वजह के इसमें मारे जाएंगे।

कृष्ण के सारे प्रयास असफल हुए और महाभारत का युद्ध हुआ। लाखों लोग मारे गए। युद्ध के अंतिम दौर में द्रौपदी के पांचों लड़के एक साथ मारे गए। सुभद्रा का लड़का अभिमन्यु पहले ही मारा जा चुका था। 

जब अपने पांचों बच्चों के मारे जाने पर द्रौपदी विलखने लगीं, हाय-तौबा मचान लगीं तो, कृष्ण ने दो टूक कहा, तुम तो हर हालात में युद्ध चाहती थी, युद्ध रोकने के हर प्रयास का सबसे अधिक विरोध कर रही थी, हर तरह से शांति की किसी भी कोशिश के खिलाफ थी। 

अब क्यों विलख रही हो, क्यों हाय तौबा मचा रही हो, तुम क्या सोचती थी कि युद्ध में दूसरों के बेटे मारे जाएंगे और तुम युद्ध का तमाशा देखोगी, तुम्हें नहीं कुछ खोना पड़ेगा। तुम्हारे बच्चे,
 तुम्हारे बदले की मानसिकता की बलि चढ़े, इसके बाद भी तुम्हे राज मिलेगा, शासन मिलेगा। तुम पटरानी बनोगी।

उनके  बारे में भी तनिक विचार करो, जिन्होंने अपने बेटों, पतियों, भाईयों और पिता को अकारण खो दिया, जिन्हें इस युद्ध से कुछ नहीं मिला। जिनका इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था ।

युद्ध के लिए ललकारने वालों को तब तक युद्ध की कीमत नहीं पता चलती, जबतक कि इस युद्ध की बलिवेदी पर उनके अपने नहीं चढ़ते हैं, द्रौपदी की तरह।

राष्ट्रवादी युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए और एक सीमित उद्देश्य के लिए होना चाहिए और जब उद्देश्य की प्राप्ति हो जाये तो सम्मानजनक समझौता करके युद्ध से बाहर निकल आना चाहिए।

इसलिए सीज फायर एक सुलझा हुआ निर्णय था।

जो लोग सीज फायर का विरोध कर रहे है उनका कोई बच्चा फौज में लड़ाई में नहीं है।

जय हिंद

युवराज संविधान-रक्षा,जाति जनगणना,आँचा-पाँचा चोदराग बघारते हुए आराम से PM की कुर्सी तक पहुँच जायेंगे

 साभार...



डोमेस्टिक फ्रंट पर मोदी को ठिकाने लगाने की दर्जनों कोशिशें कर मुँह की खाने के बाद कांग्रेस को लगा कि वो अपने विदेशी मित्रों की सहायता से मोदी प्रशासन की फॉरेन-पालिसी को विफल ठहरा के उन्हे घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी,और उसके बाद तो युवराज संविधान-रक्षा,जाति जनगणना,आँचा-पाँचा चोदराग बघारते हुए आराम से PM की कुर्सी तक पहुँच जायेंगे।

अब कांग्रेस का दुर्भाग्य यह है कि उसके शहजादे जैसा कोई मूर्ख नशेड़ी आज विदेशमंत्री नही है।चीन से लेकर अमेरिका और यूरोप तक को जीनियस Dr S. Jaishankar जी ने अकेले पानी पिला रखा है,और बहुत कोशिशों के बावजूद वैश्विक मंच पर उनके सामने कोई कुछ धुरखेल कर नही पाता. . . जैसे ही कोई गोरा भारत या भारतीय हितों या नीतियों के बारे मे मुँह खोलता है,जयशंकर जी बेहद ब्रूटल और क्रूड तरीके से - कड़वे से कड़वे शब्दों मे प्रतिक्रिया देते हुए सीधे उसके मुँह मे ही दे देते हैं घचाक से।

कांग्रेस भी अब समझने लगी है कि जब तक विदेशमंत्रालय इस एक्सट्रीमली कैपेबल एक्स-डिप्लोमैट के हाथों मे है,मोदी को इस डिपार्टमेंट मे पटखनी नही दी जा सकती।इसीलिये आपने गौर किया होगा कि फिलहाल कांग्रेस मोदी से भी अधिक हमलावर जयशंकर जी पर दिख रही है।उसका एजेंडा एक ही है — कि कुछ तो ऐसा ब्लंडर हो जाय जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की थू-थू हो और वह अलग थलग पड़ जाये,और तब वो सफेद टीशर्ट वाला अर्ध-इटालियन मूर्ख माइक उठा कर विदेशनीति पर लेक्चर छाँटते हुए - देश को बरगलाते हुए खुद को एक फॉरेन-पालिसी माएस्त्रो की तरह पोज कर सके।

कांग्रेस बस एक बात समझ नही रही. . . कि जिस दिन जयशंकर जी को वक्त मिल गया और उन्होने इनके लल्ला को वन-ऑन-वन के लिये रिंग मे घसीट लिया,बस उसी दिन शहजादे का बड़े जतन से ओढ़ा हुआ “इंटेलेक्चुअल” का नकाब फट के तार-तार हो जायेगा,और उसके भीतर से जो गधा निकलेगा उसे देख कर सारा देश कहकहे लगायेगा।

कांग्रेस जयशंकर जी को धमका रही है कि — “सोच लो, रिस्क है!”. . . . और मै बस उस दिन के इंतजार मे हूँ जब जयशंकर जी शहजादे को गिरेबान से पकड़ लेंगे,और राजमाता की आँख मे आँख डाल के कहेंगे — “रिस्क तो इसमे भी है कालीन भईया”!!! 

#Rahul_Gandhi
#Supriya_Shrinate
#Indian_National_Congress

शनिवार, 17 मई 2025

#स्कूल_या_एयरलाइन: टिकट लीजिए, क्लास चुनिए!

#स्कूल_या_एयरलाइन: टिकट लीजिए, क्लास चुनिए!


पाली के कुछ प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेना अब किसी इंटरनेशनल फ्लाइट में सीट बुक कराने जैसा हो गया है। माता-पिता जब अपने बच्चों का एडमिशन करवाने पहुंचते हैं, तो सबसे पहले उनसे पूछा जाता है—
"सर, इकोनॉमी क्लास चाहिए या बिजनेस क्लास?"

✈️ "एसी क्लासरूम—सिर्फ विशेष यात्रियों के लिए!"

अब स्कूल में पढ़ाई भी एक लग्जरी सर्विस हो गई है। अगर आप प्रीमियम कैटेगरी में हैं, तो आपका बच्चा एसी क्लासरूम में बैठेगा, डिजिटल बोर्ड पर पढ़ेगा और टीचर भी एक्स्ट्रा स्माइल देंगे! और अगर आप 'नॉन-प्रीमियम' हैं, तो बच्चा पंखे के नीचे बैठेगा, बोर्ड पर चॉक घिसता देखेगा और टीचर भी शायद उतनी ही गर्मी में पढ़ाएंगे जितनी क्लास में होगी।

बात सिर्फ इतनी नहीं है! अब क्लासरूम के अंदर भी सुविधा के नाम पर भेदभाव साफ दिखने लगा है। स्मार्ट क्लास, प्रोजेक्टर, डिजिटल बोर्ड और एसी जैसी सुविधाएं केवल उन्हीं बच्चों के लिए हैं जिनके माता-पिता मोटी रकम चुका सकते हैं। बाकी बच्चों के लिए बस ब्लैकबोर्ड और पुरानी डेस्क-कुर्सियां ही नसीब हैं।

📚 "बुक्स, यूनिफॉर्म और स्कूल शूज़—एक्सक्लूसिव ऑफर!"

बाहर दुकान से किताबें खरीदने का झंझट क्यों लें जब स्कूल खुद आपको 'स्पेशल एडिशन' किताबें बेच रहा है—बस दाम थोड़े ज्यादा हैं, लेकिन लग्जरी का सवाल है!

यूनिफॉर्म का डिज़ाइन हर साल बदला जाता है ताकि पुराने कपड़े किसी काम न आएं।

और जूते? स्कूल में मिलने वाले "ब्रांडेड" शूज़ पहनिए, वरना आपका बच्चा 'लोअर क्लास' कैटेगरी में आ जाएगा!

किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर मनमाना मुनाफा कमाना अब स्कूलों के लिए आम बात हो गई है।


💳 "भविष्य की तैयारी: EMI पर शिक्षा!"

अब शिक्षा भी फाइनेंसिंग के दायरे में आ गई है। ऐसा लगता है कि आने वाले समय में स्कूल वाले एडमिशन फॉर्म के साथ बैंक का लोन फॉर्म भी दे देंगे।
शायद EMI प्लान भी आ जाए—
"आज ही एडमिशन लें, आसान किश्तों में फीस चुकाएं!"
और हो सकता है कि कुछ स्कूल "स्कॉलरशिप लॉटरी" भी शुरू कर दें—
"खुशखबरी! इस महीने की लकी ड्रॉ में जीतने वाले बच्चे को स्मार्ट क्लास फ्री!"

🚀 "शिक्षा की ऊंची उड़ान, बस किराया चुकाइए!"

अब स्कूल में दाखिला लेना वैसा ही हो गया है जैसे एयरलाइन में सीट चुनना—

"विंडो सीट" चाहिए तो थोड़ा एक्स्ट्रा चार्ज

ज्यादा लेग स्पेस चाहिए तो 'बिजनेस क्लास' का टिकट लीजिए

और अगर सबसे पीछे वाली सीट से काम चला सकते हैं तो 'इकोनॉमी' में एडमिशन पाइए


फर्क सिर्फ इतना है कि यहां गंतव्य ज्ञान नहीं, बल्कि स्टेटस है! क्लासरूम अब सामाजिक बराबरी का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक हैसियत का प्रतीक बन गए हैं।

🎯 "शिक्षा अब सेवा नहीं, प्रीमियम पैकेज है!"

शिक्षा, जो कभी समाज का आधार मानी जाती थी, अब एक महंगी सर्विस बन चुकी है, जहां ज्ञान नहीं, बल्कि सुविधाओं का सौदा होता है। सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में क्लासरूम में भी 'फ्लाइट अटेंडेंट' होंगे जो कहेंगे—
"प्रिय छात्रो, कृपया अपनी सीट बेल्ट बांध लें, हम आपको आज शिक्षा की ऊंचाइयों तक ले जाने वाले हैं—बशर्ते आपने सही टिकट खरीदी हो!"


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अगर शिक्षा सेवा है, तो भेदभाव क्यों? अगर शिक्षा अधिकार है, तो प्रीमियम क्यों? क्या आने वाले समय में स्कूल एडमिशन का फॉर्म भी "फ्लाइट टिकट" जैसा होगा? 🤔

मंगलवार, 6 मई 2025

#राजस्थान के 28 शहरों में कल होगा #ब्लैकआउट, सायरन बजेंगेः हमले से बचाव के लिए #मॉक#ड्रिल , आखिरी बार 1971 में हुई थीं ऐसी तैयारियां

#राजस्थान के 28 शहरों में कल होगा #ब्लैकआउट, सायरन बजेंगेः हमले से बचाव के लिए #मॉक#ड्रिल , आखिरी बार 1971 में हुई थीं ऐसी तैयारियां

#7_मई को देशभर में बजेंगे हवाई हमले वाले सायरन, मॉक ड्रिलू से युद्ध जैसी तैयारियों की होगी #रिहर्सल , मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी जिसमें युद्ध जैसी स्थितियों के लिए 10 प्रकार की तैयारियों की रिहर्सल

#प्रदेश के इन शहरों में होगी मॉक #ड्रिल: कोटा, रावतभाटा (चित्तौड़गढ़), अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, गंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर, सीकर, नाल (बीकानेर), सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर), आबूरोड (सिरोही), नसीराबाद (अजमेर), भिवाड़ी, फुलेरा (जयपुर), नागौर, जालोर, ब्यावर, लालगढ़ (श्रीगंगानगर), सवाई माधोपुर, पाली और भीलवाड़ा।

ड्रिल सभी जगहों पर कल अलग-अलग समय पर की जाएगी

इस दौरान बताया जाएगा कि हमला हो जाता है तो क्या करना चाहिए। सिटी कंट्रोल से एक हूटर बजेगा। इसके बाद सभी लोगों को अपने घर की सभी लाइटें, मोबाइल टार्च, रोड लाइट, हाईमास्ट लाइट, एनएचएआई और स्टेट हाईवे पर लगी लाइट, टोल पर लगी लाइट के साथ-साथ कार की लाइट भी बंद करनी होगी।

ड्रिल के दौरान लोगों को जानकारी देनी होगी की वह कैसे एक दूसरे की मदद कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति घायल हो जाता है तो उस समय कैसे उसे उपचार मिल सके साथ ही कैसे उस तक सुरक्षा पहुंचे इस लेकर नागरिकों और छात्रों को अधिक से अधिक जागरूक करना चाहिए
*जोधपुर कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने कहा कि 7 मई को मॉक ड्रिल में एयर सायरन बजाए जाएंगे और उसके बाद आम जनता को यह बताया जाएगा कि एयर सायरन बजने पर उन्हें क्या करना है। यहां 18 जगह सायरन लगाए गए हैं*

*चिह्नित जगह पर होगा ब्लैकआउट*

*मॉक ड्रिल के तहत सिटी कंट्रोल से एक हूटर बजेगा। इसके बाद सभी लोगों को अपने घर की सभी लाइटें ,मोबाइल टार्च, रोड लाइट,हाईमास्ट लाइट,एनएचएआई और स्टेट हाईवे पर लगी लाइट,टोल पर लगी लाइट के साथ-साथ कार की लाइट भी बंद करनी होगी।*

*इस दौरान लोगों को जानकारी देनी होगी की वह कैसे एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।*
*अगर कोई व्यक्ति घायल हो जाता है तो उस समय कैसे उसे उपचार मिल सकें। इस लेकर नागरिकों और छात्रों को अधिक से अधिक जागरूक किया जाता है। एयरपोर्ट, स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर विशेष ध्यान रखा जाता है। सभी इलेक्ट्रिक सोर्स को बंद कर दिया जाता हैं,*
*जिससे कि किसी भी प्रकार की जमीन से लाइट दुश्मन तक नहीं पहुंचे और लोकेशन ट्रेस ना हो।*

*10 तरह के होंगे अभ्यास*

-हवाई हमले की चेतावनी सायरनों का संचालन किया जाएगा।
-विद्यार्थियों को नागरिक सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-तत्काल ब्लैकआउट का अभ्यास।
-महत्त्वपूर्ण ढांचों को छिपाना।
-निकासी योजना का पूर्वाभ्यास।
-वायु सेना के साथ हॉटलाइन/ रेडियो संचार लिंक का संचालन।
-वार्डन-अग्निशमन सहित नागरिक सुरक्षा सेवाओं की सक्रियता जांचना।
-नियंत्रण-छाया नियंत्रण कक्षों की कार्यक्षमता का परीक्षण करना।
-बंकरों-खाइयों की सफाई करना।
-नागरिक सुरक्षा योजनाओं को अपडेट करना एवं उनका पूर्वाभ्यास


सायरन बजते ही #अलर्ट हो जाएं... भारत-पाकिस्तान टेंशन के बीच जंग की मॉक ड्रिल कल, पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने पर, गृह मंत्रालय ने युद्ध या आपात स्थिति के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मंत्रालय ने कई राज्यों को 7 मई को मॉक ड्रिल करने का निर्देश दिया है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को हवाई हमले, ब्लैकआउट और अन्य आपात स्थितियों से बचाने के लिए #जागरूक करना है। इसमें सबसे पहले हमें डरने, घबराने और #पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है कृपया धैर्य से काम लें और प्रशासन के हर निर्णय का पालन करें, अगली अपडेट जल्दी ही चौपाल समाचार पर #mockdrill #blackout #rehearsal 

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