जय श्री कृष्णा, ब्लॉग में आपका स्वागत है यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें। मैं हर इंसान के लिए ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ब्लॉग को बनाए रख रहा हूँ। धन्यवाद, "साँवरिया " #organic #sanwariya #latest #india www.sanwariya.org/
यह ब्लॉग खोजें
मंगलवार, 6 मई 2025
#राजस्थान के 28 शहरों में कल होगा #ब्लैकआउट, सायरन बजेंगेः हमले से बचाव के लिए #मॉक#ड्रिल , आखिरी बार 1971 में हुई थीं ऐसी तैयारियां
पहलगाम आतंकवादी घटना वह नहीं है जो दिखाई दे रही है बल्कि यह एक “चीन पाकिस्तान और कांग्रेस का बुना हुआ जाल" लगता है। यह भारत को अनंत छद्म युद्ध में फंसाने के लिए एक षड्यंत्र लगता है।
भीलवाड़ा की शांत गलियों में एक ज़हर घुल रहा है, हमारी युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा है। ऑनलाइन सट्टेबाजी के शिकारी खुलेआम घूम रहे हैं,
शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025
इस ब्रह्मांड में कुछ भी बिना प्लानिंग के नहीं होता।
यह जीवन, मृत्यु और प्रकृति की योजना से जुड़ी गहराईयों को स्पर्श
1. “अकाल मृत्यु” – एक मानव निर्मित धारणा:
हम जब किसी को युवा अवस्था में या किसी दुर्घटना, बीमारी, आत्महत्या या अन्य अप्रत्याशित घटना से मरते देखते हैं, तो हम कह उठते हैं — “अरे! इसकी तो अकाल मृत्यु हो गई।”
लेकिन यह सोच हमारी सीमित समझ, भावनात्मक पीड़ा, और समय की संकल्पना पर आधारित है। हम यह मानकर चलते हैं कि एक इंसान को “इतनी उम्र” तक जीना चाहिए — जैसे 70 या 80 वर्ष। जब उससे पहले किसी की मृत्यु होती है, तो हमें लगता है कि उसकी जीवनरेखा अधूरी रह गई।
लेकिन…
2. ब्रह्मांड का नियम — कुछ भी आकस्मिक नहीं होता:
प्रकृति में कोई दुर्घटना नहीं होती।
जो कुछ भी घट रहा है — वह एक सूक्ष्म और गहराई से रचा गया “प्लान” है। यह ठीक वैसे ही है जैसे कोई सुपर कम्प्यूटर पहले से सब कोड कर चुका हो।
- कब कौन पैदा होगा,
- किससे मिलेगा,
- किसे क्या अनुभव होगा,
- और कब मृत्यु होगी — कैसे होगी — किसके हाथों होगी — वो भी किस गाड़ी से या किस परिस्थिति में होगी —
ये सब पहले से तय होता है।
इसे ही कुछ लोग कर्म का सिद्धांत, प्रारब्ध या प्रकृति का डीप एल्गोरिद्म कहते हैं।
3. आत्मा की यात्रा — चेतना और अनुभव:
हम केवल शरीर नहीं हैं। हम एक चेतना (Consciousness) हैं, जो अनुभव के लिए इस भौतिक शरीर को लेती है। चेतना की ये यात्रा कई परतों में होती है:
- निअक्षर से हंस (शुद्ध चेतना)
- फिर सूरत (मन-बुद्धि)
- फिर सूक्ष्म शरीर (अहंकार, वासना, स्मृति आदि)
- और फिर स्थूल शरीर (भौतिक शरीर)
इस अनुभव को पूरा करने के लिए आत्मा जन्म लेती है — और मृत्यु तक की पूरी रूपरेखा पहले से ही तय होती है। जब उसका उद्देश्य पूर्ण होता है, तब शरीर को त्याग देती है। इस त्याग को ही हम मृत्यु कहते हैं।
4. अकाल मृत्यु का भ्रम क्यों?
हमें मृत्यु की वजहें दिखाई देती हैं — जैसे:
- एक्सीडेंट
- बीमारी
- आत्महत्या
- मर्डर
लेकिन हमें नहीं दिखता कि इन सब घटनाओं का बीज कहां, कैसे, और कब बोया गया था।
इसलिए हम सोचते हैं कि ये “अचानक” हो गया।
जबकि, ज्ञानी लोग कहते हैं —
“इस ब्रह्मांड में कुछ भी बिना प्लानिंग के नहीं होता।”
5. शास्त्रों में भी संकेत:
-
भगवद्गीता (2.27) में कहा गया है:
“जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु: ध्रुवं जन्म मृतस्य च।”
जो जन्म लेता है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
और जो मरता है, उसका पुनर्जन्म भी निश्चित है। -
योगवासिष्ठ, उपनिषदों, और शिव सूत्रों में भी कहा गया है कि आत्मा की गति कर्मों के अनुसार होती है।
निष्कर्ष:
“अकाल मृत्यु” जैसी कोई चीज़ वास्तव में नहीं है।
ये एक मानव-निर्मित धारणा है, जो हमारी सीमित समझ, भावनात्मक दृष्टिकोण और भ्रम पर आधारित है।
प्रकृति में सब कुछ नियोजित है, पूर्व निर्धारित है, और गहन योजना के अनुसार ही चलता है।
हमें जो “अचानक” लगता है, वो वास्तव में बहुत पहले से लिखा जा चुका होता है।
रविवार, 20 अप्रैल 2025
"युद्ध तो तुमको करना ही पड़ेगा – एक यथार्थ बोध"
गुरुवार, 17 अप्रैल 2025
खोयी हुई, या गायब की हुई इतिहास की एक झलक
बुधवार, 16 अप्रैल 2025
कॉन्वेंट" हम जिस शब्द को गर्व से उच्चारित करते हैं, उसकी वास्तविकता क्या है।
गुरुवार, 3 अप्रैल 2025
अब वक़्फ़ संपत्तियों का सही इस्तेमाल होगा, और मुस्लिम समाज को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।
वक़्फ़ से मुस्लिम भी वाक़िफ़ नहीं हैं!dgs
भारत में मुस्लिम समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर हमेशा चर्चा होती है। यह कहा जाता है कि "मुस्लिम गरीब और मजलूम हैं," लेकिन क्या कभी किसी ने यह सोचा कि वक़्फ़ बोर्ड, जो अरबों-खरबों की संपत्ति का मालिक है, उसने अब तक मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए क्या किया?
आज लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पेश किया गया, और इस पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि खुद मुस्लिम समाज के लोग भी वक़्फ़ की असलियत से अंजान हैं।
क्या है वक़्फ़ बोर्ड?
वक़्फ़ की संपत्ति वह होती है, जिसे किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा दान किया जाता है ताकि जरूरतमंदों और गरीबों की भलाई हो सके। लेकिन वक़्फ़ बोर्ड, जो कि इन संपत्तियों की देखरेख के लिए बना था, क्या उसने इस दान का सही इस्तेमाल किया?
आज भारत में वक़्फ़ बोर्ड अरबों की संपत्तियों का मालिक है, लेकिन आम मुस्लिम के जीवन में इसका कोई सकारात्मक प्रभाव क्यों नहीं दिखता?
क्या वक़्फ़ बोर्ड ने मुस्लिम समाज के लिए कुछ किया?
✅ क्या वक़्फ़ बोर्ड ने गरीब मुस्लिम बच्चों के लिए उच्च स्तरीय स्कूल और कॉलेज बनाए?
✅ क्या वक़्फ़ बोर्ड ने मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाया?
✅ क्या गरीब मुस्लिमों को मुफ्त इलाज के लिए वक़्फ़ बोर्ड ने अस्पताल बनाए?
✅ जब मुस्लिम समुदाय के लोग किसी आपराधिक मामले में फंसते हैं, तो क्या वक़्फ़ बोर्ड उनकी मदद करता है?
✅ क्या वक़्फ़ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक़ से पीड़ित महिलाओं को कोई सहायता दी?
अगर इन सभी सवालों का जवाब "नहीं" है, तो फिर यह अरबों की संपत्ति आखिर जाती कहाँ है?
वक़्फ़ संपत्तियों की असली हकीकत!
❌ वक़्फ़ बोर्ड की अधिकांश संपत्तियों पर होटल, रिसॉर्ट और आलीशान इमारतें खड़ी कर दी गईं
❌ वक़्फ़ संपत्तियों से होने वाली आमदनी का कोई रिकॉर्ड नहीं और न ही इसका लाभ आम मुस्लिमों तक पहुंचता है
❌ वक़्फ़ बोर्ड ने गैर-मुस्लिमों को तो छोड़िए, खुद मुस्लिम समुदाय की भी कोई ठोस मदद नहीं की
❌ जब मुस्लिम समुदाय को किसी कानूनी सहायता की जरूरत होती है, तो वक़्फ़ बोर्ड चुप रहता है, लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद वकील मुहैया कराता है
#WaqfBoardAmendmentBill से क्या बदलेगा?
अब सरकार इस भ्रष्ट व्यवस्था पर लगाम लगाने जा रही है।
✅ अब कोई सरकारी संपत्ति वक़्फ़ घोषित नहीं की जा सकेगी
✅ अब कोई भी संपत्ति तभी वक़्फ़ मानी जाएगी, जब दान करने वाला कम से कम 5 साल से मुस्लिम हो
✅ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और कलेक्टर उसकी देखरेख करेगा
✅ वक़्फ़ बोर्ड के फैसलों को अब कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी
✅ अब वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और उनका सही इस्तेमाल हो सकेगा
विपक्ष को इस बिल से इतनी दिक्कत क्यों हो रही है?
👉 239 विपक्षी सांसदों में सिर्फ 24 मुस्लिम हैं, लेकिन 215 हिंदू सांसद इस बिल का विरोध कर रहे हैं!
👉 1000 चर्च इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि वक़्फ़ बोर्ड से ईसाई समुदाय भी परेशान था
👉 अब वक़्फ़ बोर्ड में 2 मुस्लिम महिलाओं और 2 गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी
👉 विपक्ष और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बदलाव से इसलिए घबरा रहे हैं, क्योंकि अब वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों पर उनकी मनमानी नहीं चल पाएगी
अब समय है जागने का!
मुस्लिम समाज को अब यह सोचना चाहिए कि क्या वक़्फ़ बोर्ड वास्तव में उनके कल्याण के लिए काम कर रहा था, या फिर यह सिर्फ राजनीति का एक हिस्सा था?
अब वक़्फ़ संपत्तियों का सही इस्तेमाल होगा, और मुस्लिम समाज को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।
#WaqfBoard #WaqfAct #WaqfProperties #WaqfAmendmentBill #IndianMuslims #MuslimCommunity #Welfare #Transparency #Justice
बुधवार, 2 अप्रैल 2025
राजस्थान का ऐतिहासिक घुड़ला पर्व: सत्य जो अनजान है!
function disabled
Old Post from Sanwariya
- ► 2024 (358)
- ► 2023 (420)
- ► 2022 (477)
- ► 2021 (536)
- ► 2020 (341)
- ► 2019 (179)
- ► 2018 (220)
- ► 2012 (671)