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मंगलवार, 4 नवंबर 2025

आइए जानते हैं वो Money Habits जो हर मिडिल-क्लास इंसान को सीखनी चाहिए 👇

आइए जानते हैं वो  Money Habits जो हर मिडिल-क्लास इंसान को सीखनी चाहिए 👇

मैं आपको कुछ ऐसे real और practical टिप्स बताने जा रहा हूँ जो middle-class लोगों के लिए बनाए गए हैं —
ना किसी expensive course की ज़रूरत, ना कोई झूठा motivational dialogue।
बस थोड़ी समझ, थोड़ी consistency और थोड़ी स्मार्टनेस।

🧠 1. अपने खर्चों को ट्रैक करना शुरू करो

ज्यादातर लोग नहीं जानते कि उनका पैसा कहां चला जाता है।
हर महीने 2,000–₹5000 ऐसे ही “गायब” हो जाते हैं।

हर महीने सैलरी मिलते ही सबसे पहला काम होना चाहिए — अपने खर्चे ट्रैक करना
95% middle-class लोग यह गलती करते हैं कि वे “सोचते” हैं उन्हें पता है कहाँ खर्च हो रहा है,
लेकिन जब तक आप
लिखते नहीं, तब तक आपको असली picture नहीं दिखती।


📱 कोई Expense Tracker App (जैसे Walnut या Money Manager) रखो और हर खर्च नोट करो।

👉 पहला कदम है “Money Awareness”।

👉 Affiliate-friendly Tools:

  • Amazon, Flipkart पर खरीदने से पहले CashKaro या CRED app से cashback लेना न भूलें।
  • Zerodha या Groww जैसे apps पर investment करते समय भी referral rewards मिलते हैं।

🔹 Example:
अगर आप महीने में ₹10,000 की shopping करते हैं और CashKaro से सिर्फ 5% cashback भी मिलता है,
तो सालभर में ₹6,000 तक की saving हो सकती है — मतलब एक EMI free!



💳 2. पहले बचत करो, बाद में खर्च करो

भारतीयों की सबसे बड़ी गलती है — “जो बचा, वही बचत।”
CA का कहना है —

“Income – Savings = Expenses”

न कि

“Income – Expenses = Savings”

हर महीने सैलरी आते ही 30% हिस्सा SIP, compulsory savings या Insurance investment and Emergency Fund में डालो।
बाकी पैसों से ही खर्च चलाओ।

 “Automatic Saving Rule” अपनाओ – Pay Yourself First

हर महीने सैलरी आते ही पहले खर्च नहीं, saving करनी चाहिए
Bank में एक
auto-transfer rule लगाओ:

“हर महीने सैलरी आते ही 30% एक अलग savings account या mutual fund SIP में चला जाए।”

🔹 Example:
अगर आप ₹5,000 हर महीने SIP में डालते हैं, तो 10 साल में यह ₹12 लाख तक बन सकता है (12% return पर)।
आपने बस शुरुआत की, बाकी काम time ने कर दिया।


📚 3. फाइनेंशियल एजुकेशन में इन्वेस्ट करो

स्कूल हमें गणित सिखाता है, लेकिन पैसे का गणित नहीं।
हर महीने कुछ समय YouTube, Quora या किताबों में लगाओ —
जैसे Rich Dad Poor Dad

Rich Dad Poor Dad Book In Hindi 25Th Anniversary Edition Book, New1

The Psychology of Money।

The Psychology Of Money Book Hindi: Books

जितना ज्यादा सीखोगे, उतना पैसा तुम्हारे लिए काम करेगा।

🔹 Real Example:
मेरी एक जानकार गृहिणी ने Canva सीखा, Instagram templates बनाना शुरू किया और अब Fiverr पर महीने के ₹15,000 कमा रही हैं।
घर बैठे, बस laptop और internet से।

. “Smart Spending” सीखो – Offers, Cashback और Coupons का सही इस्तेमाल करो

पैसे बचाना मतलब सिर्फ कटौती नहीं।
अगर आप समझदारी से खरीदारी करें, तो आप हर महीने ₹2,000-₹3,000 तक बचा सकते हैं।

👉 Affiliate-friendly Tools:

  • Amazon, Flipkart पर खरीदने से पहले CashKaro या CRED app से cashback लेना न भूलें।
  • Zerodha या Groww जैसे apps पर investment करते समय भी referral rewards मिलते हैं।

🔹 Example:
अगर आप महीने में ₹10,000 की shopping करते हैं और CashKaro से सिर्फ 5% cashback भी मिलता है,
तो सालभर में ₹6,000 तक की saving हो सकती है — मतलब एक EMI free!

 “Smart Shopping” – जो चाहिए वही लो, ट्रेंड नहीं

Zomato Gold, Netflix Premium, EMI वाला iPhone – ये सब status दिखाने के लिए नहीं, पैसे डुबाने के लिए हैं।
Middle-class trap यही है —
दूसरों को impress करने के लिए खुद को stress में डालना।

👉 Solution:

  • हर खरीद से पहले खुद से पूछो — “क्या मुझे सच में इसकी ज़रूरत है?”
  • Impulse shopping रोकने के लिए 1-Day Rule अपनाओ —
    कोई चीज़ खरीदने से पहले 24 घंटे सोचो।

🔹 Example:
मेरी एक दोस्त ने यही rule अपनाया और साल में ₹30,000 बचाए — बस impulse shopping छोड़कर।

Credit Card को समझदारी से इस्तेमाल करो — दिखावे के लिए नहीं”

Credit card एक powerful tool है, लेकिन गलत इस्तेमाल पर ये debt trap बन जाता है।
कई लोग सिर्फ cashback या points के लिए खर्च बढ़ा देते हैं — और फिर EMI में फँस जाते हैं।

👉 Rule:

  • हर महीने पूरा बिल time पर चुकाओ
  • अगर afford नहीं कर सकते तो credit card बंद कर दो
  • और cash या UPI से खरीदारी करो ताकि spending control रहे



📈 4. “Multiple Income Sources” बनाओ

सिर्फ सैलरी से अमीर कोई नहीं बनता।

CA की सलाह —

“एक इनकम से जिंदगी चलती है,
लेकिन कई इनकम से आज़ादी मिलती है।”
फ्रीलांसिंग, ब्लॉगिंग, डिजिटल प्रोडक्ट, एफिलिएट मार्केटिंग या छोटा ऑनलाइन बिज़नेस — कुछ भी शुरू करो।
छोटा शुरू करो, बड़ा सोचो।

🧾 5. Tax और Insurance को समझो

भारतीय मिडिल क्लास की आधी कमाई टैक्स और मेडिकल खर्चों में चली जाती है।
लेकिन अगर आप सही प्लान बनाओ तो आप हजारों रुपये बचा सकते हो।


AIF या SIP में निवेश करो
Insurance ABSLI Nishchit Ayush  (सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत)
Health Insurance लो — ताकि मेडिकल इमरजेंसी में सेविंग न टूटे


🧘‍♂️ 6. Lifestyle Inflation से बचो

सैलरी बढ़ते ही खर्च बढ़ाना बंद करो।

नया फोन, नया बाइक, नया EMI — यही सबसे बड़ा जाल है।

हर बार जब इनकम बढ़े, तो कम से कम 50% हिस्सा निवेश बढ़ाओ, खर्च नहीं।

🚀 7. धैर्य रखो और Consistency बनाए रखो

“6 महीने गायब हो जाओ” का मतलब है —

Parties, Netflix, और बेवजह स्क्रॉलिंग छोड़कर खुद में इन्वेस्ट करो।

पहले 6 महीने मुश्किल लगेंगे, लेकिन उसके बाद
💸 पैसे की समझ,
🧠 आत्मविश्वास,
और 💪 फ्रीडम — सब कुछ मिलेगा।

🏁 निष्कर्ष:

भारत में 80% लोग सिर्फ सैलरी के भरोसे हैं।

लेकिन जो 7 हैबिट ऊपर लिखी हैं, वो आपको उस 20% में ला सकती हैं —
जहां लोग पैसे के लिए नहीं, बल्कि पैसा उनके लिए काम करता है।

तो अगर आप वाकई में “मालामाल” बनना चाहते हैं —
👉 अगले 6 महीने के लिए गायब हो जाओ
👉 और इन 7 मनी हैबिट्स को अपनी जिंदगी में उतारो।

निष्कर्ष:

अगर आप इस महीने से सिर्फ 3 काम शुरू करते हैं —

1️⃣ खर्च ट्रैक करना
2️⃣ Auto SIP लगाना
3️⃣ और एक नया skill सीखना

तो अगले 6 महीने में आपकी financial life पूरी तरह बदल सकती है।

Middle-class struggle से निकलने का रास्ता “ज्यादा कमाना” नहीं, बल्कि “स्मार्ट सोचना” है।



परिणाम?

6 महीने बाद लोग पूछेंगे — “भाई, तू बदल गया है!”
और आप मुस्कुराओगे — क्योंकि आपको पता होगा क्यों। 💼


Your FD लाया है – “अक्षय प्लान"

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सोमवार, 3 नवंबर 2025

क्या आप जानते हैं की धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु का बदला कैसे लिया गया और किसने लिया ?

 

छत्रपति संभाजी की हत्या के बाद औरंगजेब के सेनापति जुल्फिकार खान ने रायगढ़ पर कब्जा कर छत्रपति संभाजी की पत्नी येसु बाई और उनके पुत्र को भी कैद कर लिया जिसके बाद छत्रपति संभाजी महाराज के छोटे भाई राजाराम जी महाराज छत्रपति के पद पर विभूषित हुए।

छत्रपति संभाजी महाराज को औरंगजेब ने 40 दिनों तक भयंकर यातनाएं देकर मारा था। इस हाहाकारी मृत्यु ने मराठों के सीनों में आग लगा दी। उनके सारे मतभेद खत्म हो गए और सिर्फ एक ही लक्ष्य रह गया राक्षस औरंगजेब का सर्वनाश।

संगमेश्वर के किले में जब शूरवीर छत्रपति संभाजी अपने 200 साथियों के साथ औरंगजेब के सिपहसालार मुकर्रम खान के 10 हजार मुगल सिपाहियों के साथ जंग लड़ रहे थे, उस वक्त छत्रपति संभाजी के साथ एक और बहादुर योद्धा अपनी जान की बाजी लगा रहा था जिसका नाम था माल्होजी घोरपड़े।

छत्रपति संभाजी के साथ लड़ते हुए माल्होजी घोरपड़े भी वीरगति को प्राप्त हो गए और माल्होजी घोरपड़े के पुत्र संताजी घोरपड़े ने ही अपने युद्ध अभियानों से औरंगजेब की नाक काट डाली और औरंगजेब को इतिहास में भगोड़ा भी साबित कर दिया।

संताजी घोरपड़े के साथ एक और वीर मराठा ने दिया जिसका नाम था धना जी जाधव। औरंगजेब को यकीन था कि छत्रपति संभाजी की हत्या के बाद मराठों का मनोबल टूट जाएगा लेकिन वो उस वक्त हैरान हो गया जब तुलापुर में अचानक संताजी और धनाजी ने हमला कर दिया। औरंगजेब लाखों की सेना के साथ महाराष्ट्र के तुलापुर नाम की जगह पर अपना डेरा डाले बैठा हुआ था।

यह वही जगह थी जहां पर औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज की क्रूरता से हत्या की थी। गुरिल्ला युद्ध में पारंगत संताजी 2000 मराठा सैनिकों के साथ औरंगजेब की सेना पर खूंखार शेर की तरह टूट पड़े। संताजी ने अपने साथियों के साथ गाजर मूली की तरह मुगलों को काटना शुरू कर दिया।

इस युद्ध का वर्णन करते हुए मुगलिया इतिहासकार काफी खान लिखता है कि तुलापुर की जंग के बाद संताजी की दहशत मुगलिया सैनिकों के दिलों में घर कर गई थी। संताजी के सामने पड़ने वाला मुगलिया सैनिक या तो मार दिया जाता या कैद हो जाता। आखिर में हालत ये हो गए कि संताजी का नाम सुनते ही मुगल सेना में भगदड़ मच जाती थी।

तुलापुर में संताजी के मराठों के अचानक हमले से मुगल जोर-जोर से चिल्लाने लगे हुजूर मराठे आ गए। एक तरफ पूरी मुगल सेना औरंगजेब की जान बचाने की कोशिश में लगी हुई थी तो दूसरी तरफ मराठे मुगलियों लाशों के ढेर लगा रहे थे।

मराठे मुगल छावनी के अंदर घुस गए। इतना कत्लेआम हुआ कि औरंगजेब अपनी जान बचाकर भागा। औरंगजेब की जान बच गई लेकिन पूरे मुगल साम्राज्य की नाक कट गई और औरंगजेब पर भगोड़े का ठप्पा लग गया। मराठे औरंगजेब के कैंप के ऊपर लगे दो सोने के कलश काटकर सिंहगढ़ किले को लौट आए।

अगले दिन जब सुबह हुई तो औरंगजेब मुगलों की मौत का मंजर देखकर हैरान रह गया और कहने लगा या अल्लाह किस मिट्टी के बने हैं ये मराठे यह ना थकते हैं ना झुकते हैं ना पीछे हटते हैं इन्हें मिटाते मिटाते कहीं हम ना मिट जाएं औरंगजेब इस दुख भरे हादसे से पूरी उम्र बाहर ही नहीं आ पाया था।

मराठे मुगल छावनी के अंदर घुस गए। इतना कत्लेआम हुआ कि औरंगजेब अपनी जान बचाकर भागा। औरंगजेब की जान बच गई लेकिन पूरे मुगल साम्राज्य की नाक कट गई और औरंगजेब पर भगोड़े का ठप्पा लग गया। मराठे औरंगजेब के कैंप के ऊपर लगे दो सोने के कलश काटकर सिंहगढ़ किले को लौट आए।

अगले दिन जब सुबह हुई तो औरंगजेब मुगलों की मौत का मंजर देखकर हैरान रह गया और कहने लगा या अल्लाह किस मिट्टी के बने हैं ये मराठे यह ना थकते हैं ना झुकते हैं ना पीछे हटते हैं इन्हें मिटाते मिटाते कहीं हम ना मिट जाएं औरंगजेब इस दुख भरे हादसे से पूरी उम्र बाहर ही नहीं आ पाया था।

इस घटना के दो दिन बाद ही संता जी ने रायगढ़ किले पर हमला बोल दिया। छत्रपति संभाजी की पत्नी येसुबाई को कैद करने वाले मुगल सरदार जुल्फिकार खान ने यहां पहले ही घेरा बनाया हुआ था।

मराठों ने जुल्फिकार खान की सेना को काटकर रायगढ़ किले पर भी कत्लेआम मचा दिया और मुगलों का बेश कीमती खजाना घोड़े और पांच हाथी अपने साथ पकड़कर पन्हाला लेकर आए। इस तरह कई गोरिल्ला युद्धों ने मुगल सेना का मनोबल तोड़ कर रख दिया।

मराठों को जब भी मौके मिलता वो मुगल सेना को चीर के रख देते। अब बारी मुकर्रम खान की थी। जिसने छत्रपति संभाजी महाराज को छल और धोखे से कैद किया था उस। 50 हजार रुपए ईनाम देते हुए, मुकर्रम खान को औरंगजेब ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर और कोकण प्रांत का सूबेदार नियुक्त किया था। मराठों ने यह प्रण लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए पर उस मुकर्रम खान को जिंदा नहीं छोड़ना है और दिसंबर सन 1689 को मराठों ने मुकर्रम खान की विशाल सेना को घेरकर मुगलों को भिंडी की तरह तोड़ना शुरू कर दिया।

इस घनघोर युद्ध में अब संताजी घोरपड़े ने मुकर्रम खान को दौड़ा दौड़ा कर मारा। खून से लथपथ पड़े मुकर्रम खान की ये दुर्दशा देखकर मुगल सेना उसे जंगलों में लेकर भाग गई पर मराठों के दिए घावों ने जंगल में तड़पा तड़पा कर मुकर्रम खान की जान ले ली। मुकर्रम खान को मारकर मराठों ने छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु का बदला लिया ।

संताजी घोरपड़े के साहस और शौर्य पर खुश होकर सन 1691 को छत्रपति राजाराम महाराज ने उन्हें मराठा साम्राज्य का सरसेनापति घोषित किया। सर सेनापति बनते ही संताजी ने अपना पहला निशाना मुगल सल्तनत को बनाया और अपने साथ 15 से 20 हजार का मराठा लश्कर लेकर औरंगजेब की मुगल सल्तनत में भयंकर तबाही मचा दी। कृष्णा नदी पार कर्नाटक जैसे एक के बाद एक मुगल इलाकों में मराठा साम्राज्य के जीत का डंका बजाया।

औरंगजेब मराठों के डर से सह्याद्री के पर्वतों में इधर से उधर भागता। लगातार 27 साल मराठों ने औरंगजेब को इतना घुमाया इतना दौड़ाया कि उसका जीना मुश्किल हो गया अंत में मराठों के हाथों हो रही लगातार मुगलों की पराजय के दुख में वह नीच औरंगजेब तड़प तड़प कर महाराष्ट्र में ही मर गया।

कल्कि भगवान कब अवतरित होंगे

 कल्कि भगवान का अवतार तब होगा जब-

1- गंगा जी, तुलसी और गौ पृथ्वी छोड़कर चली जाएंगी।

2- मनुष्यों की अधिकतम आयु 20 वर्ष हो जाएगी, स्त्रियां 5 वर्ष की आयु में गर्भवती होंगी, 16 वर्ष की आयु में लोग वृद्ध हो जाएंगे।

3- गौएं भी बकरियों की तरह छोटी छोटी और कम दूध देने वाली हो जाएगी।.

4- अन्न उगना बंद हो जाएगा, लोग मांस मछली खांएंगे और बकरी भेड़ का दूध पीएंगे।

5- स्त्रीयां पतिव्रता बनकर नहीं रहेंगी बल्कि उसके साथ रहेंगी जो धनवान होगा।

6- जुआ, शराब, परस्त्रिगमन और हिंसा ही पुरुषों का धर्म रह जाएगा।

7- -ज्यों घोर कलयुग आता जाएगा, त्यों-त्यों उत्तरोत्तर धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरणशक्ति का लोप होता जाएगा

8- देवताओं के लिए कोई भी मनुष्य जप , तप , नियम नहीं अपनाएगा इससे देवता लोगों से रुष्ट हो जाएंगे और पानी बरसना बंद हो जाएगा।

9- तारों की ज्योति फीकी पड़ जाएगी, दसों दिशाएं विपरीत होंगी। पुत्र पिता को तथा बहुएं सास को काम करने भेजेंगी

10- सभी प्राणी दुराचारी, लूट खसोट करने वाले, नास्तिक, हत्यारे, कामी और क्रोधी हो जाएंगे।

अभी कलयुग का पहला चरण चल रहा है और गंगा जी भी पृथ्वी पर प्रवाहित हो रही हैं । कलयुग की आयु 4,26,000 वर्ष मानी गई है, अभी लगभग 5100 वर्ष बीत चुके हैं। कलयुग के अंत में धर्म की स्थापना करने और पापियों का सर्वनाश करने के लिए भगवान कल्कि का अंतिम अवतार होगा।

भगवान श्री कल्कि निष्कलंक अवतार हैं। भगवान कल्कि के पिता भगवान विष्णु के भक्त होंगे, साथ में वह वेदों और पुराणों के ज्ञाता होंगे। उनके पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। रामावतार के समान ही कल्कि अवतार में भी भगवान चार भाई होंगे इनके अन्य तीन भाइयों के नाम होंगे सुमन्त, प्राज्ञ और कवि। अपने इन्हीं भाइयों के साथ मिलकर भगवान धर्म की स्थापना करेंगे।

भगवान कल्किजी के याज्ञवलक्य जी पुरोहित और भगवान परशुराम उनके गुरु होंगे। उनकी दो पत्नियां होंगी। उनकी पहली पत्नी का नाम लक्ष्मी रूपी पद्मा और दूसरी पत्नी का नाम वैष्णवी शक्ति रूपी रमा होंगी। देवी वैष्णवी यानी माता वैष्णो देवी जो रामावतार के समय से भगवान से विवाह से लिए तपस्या कर रही हैं उनकी तपस्या कल्कि भगवान पूर्ण करेंगे और उनसे विवाह करेंगे। उनके पुत्र होंगे- जय, विजय, मेघमाल तथा बलाहक।

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025

अपने दो कौड़ी के राजनैतिक एजेंडे के चलते अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद ना करें।

*टाटा समूह में 900,000 कर्मचारी हैं।*

बिरला समूह में 550000 कर्मचारी है

अडानी में 400000 कर्मचारी है
एल एंड टी में 3,38,000 लोग कार्यरत हैं। 

इंफोसिस में 2,60,000 कर्मचारी हैं। 

महिंद्रा एंड महिंद्रा के 2,60,000 कर्मचारी हैं। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2,36,000 लोग हैं। 

विप्रो में 2,10,000 कर्मचारी हैं। 
एचसीएल में 1,67,000 कर्मचारी हैं। 

एचडीएफसी बैंक में 1,20,000 कर्मचारी हैं। 

आईसीआईसीआई बैंक में 97,000 कर्मचारी हैं। 

टीवीएस समूह में 60,000 कर्मचारी हैं। 

मात्र ये 12 कंपनियां मिलकर *लगभग 40 लाख भारतीयों को रोजगार देती हैं - सम्मानजनक वेतन के साथ।*

ये केवल वो आँकड़े हैं जो इनके डायरेक्ट पेरोल पर हैं। इनके अलावा ऑफ रोल्स, ऐसोशिएट्स, डीलर्स, एजेंट्स, इनके प्रोडक्ट्स से जुड़े सहायक प्रोडक्ट्स की कंपनियां। इनके सहारे जन्मी पैकेजिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट सेक्टर। लिस्ट बहुत लंबी है।

किसी कंपनी के अगर डायरेक्ट 1 लाख कर्मचारी हैं तो मान के चलिए कि कम से कम चार लाख ऐसे हैं जिनका चूल्हा उसी कम्पनी के कारण चलता है।

और मैं मात्र 12 बड़ी कंपनियों की बात कर रहा हूँ। हजारों ऐसी प्राइवेट कंपनियां हैं देश में जो रोजगार पैदा कर रही हैं।

*ये 40 लाख कॉर्पोरेट नौकरियां भारत में पिछले 70 वर्षों में सृजित कुल केंद्र सरकार की नौकरियों (48.34 लाख) के आधे से अधिक हैं।*

यह पिछले 70 वर्षों में कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में सृजित कुल सरकारी नौकरियों का भी 5 गुना है! 

*निजी क्षेत्र का सम्मान करें, उन्हें गालियों से मत नवाजें।*
 अपने राजनैतिक एजेंडे और पसंद नापसंद के कारण उन लोगों का मजाक ना उड़ायें जो देश के विकास में बहुत बड़े सहभागी हैं। 

*नौकरी देने वालों के लिए जयकार जयकार भले ना करें लेकिन उन्हें इज़्ज़त देना तो सीखिए।* 

*वे लाखों भारतीयों के लिए आजीविका पैदा कर रहे हैं।* 

*भारत में 3 पीढ़ियों की आर्थिक क्षमता को बर्बाद करने वाले असफल समाजवादी राजनेताओं की बात न सुनें।*

 यदि आप आने वाली पीढ़ियों के लिए उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं, तो भारत को ऐसे हजारों नए निगमों की आवश्यकता है जो उच्च वेतन वाली नौकरियों का सृजन करते हैं।

अपने दो कौड़ी के राजनैतिक एजेंडे के चलते अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद ना करें। खुद कभी आईना जरूर देखें कि क्या आपकी राजनैतिक नफ़रतें आपकी पीढ़ियों के भविष्य से ज्यादा जरूरी है। 

*देशद्रोही लोग देश का विनाश चाहता है ,*
*उन्हें विदेशी कंपनीयों से उसको पैसा मिलता है देश के उद्योगपतियों के खिलाफ जनता को भड़काने के लिए।* अतः सतर्क रहे सावधान रहें

रविवार, 26 अक्टूबर 2025

छॅंठ पूजा की संपूर्ण कथा

🚩🏵️‼️छॅंठ पूजा की संपूर्ण कथा‼️🏵️🚩

🌞 ❛❛ छठ पूजा भारत का एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र पर्व है, जो सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है ! यह पर्व दीपावली के छह दिन बाद, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है ! चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है ! ❜❜

🌞 छठ पूजा की उत्पत्ति और पौराणिक कथाएं : 〰️
🏵️ द्रौपदी और पांडवों की कथा : 〰️
❛❛ महाभारत काल में जब पांडव जुए में अपना सब कुछ, राज्य, धन, और सम्मान हार गए थे, तब वे गहन दुःख में थे ! उस समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी को छठ व्रत करने का उपदेश दिया ! द्रौपदी ने पूरे मन, श्रद्धा और नियम पूर्वक सूर्य देव की उपासना की ! उन्होंने छठी मैया की आराधना कर यह प्रार्थना की कि उनके परिवार को पुनः सुख और सम्मान मिले ! कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को उनका खोया हुआ राजपाट वापस मिल गया ! तभी से छठ व्रत को संकटों से मुक्ति, समृद्धि और सफलता प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है ! ❜❜

🏵️ राजा प्रियवद और रानी मालिनी की कथा : 〰️
❛❛ प्राचीन समय में राजा प्रियवद और रानी मालिनी संतानहीन थे ! संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया ! यज्ञ पूर्ण होने पर महर्षि ने रानी को यज्ञ की खीर दी !
रानी ने वह खीर ग्रहण की, जिससे उन्हें पुत्र प्राप्ति तो हुई, लेकिन दुर्भाग्यवश वह बालक मृत पैदा हुआ ! ❜❜

❛❛ राजा प्रियवद पुत्र-वियोग के दुःख में श्मशान पहुँचे और अपने प्राण त्यागने का निश्चय कर लिया ! उसी समय आकाश से एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ, और उसमें से एक देवी अवतरित हुईं ! उन्होंने कहा, “राजन, मैं छठी देवी हूँ, सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूँ ! यदि तुम मेरी पूजा और व्रत करोगे तो तुम्हें जीवित पुत्र प्राप्त होगा" ! ❜❜

❛❛ राजा प्रियवद ने श्रद्धा से छठी देवी की पूजा की ! देवी प्रसन्न हुईं और उन्हें एक सुन्दर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई !
तभी से यह व्रत संतान-सुख और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाने लगा ! ❜❜

🏵️ भगवान श्री राम और माता सीता की कथा : 〰️
❛❛ लंका विजय के बाद जब भगवान श्री राम अयोध्या लौटे और रामराज्य की स्थापना हुई, तब उन्होंने और माता सीता ने भी कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य देव की उपासना की ! अगले दिन सप्तमी को उन्होंने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया ! इस प्रकार उन्होंने लोक कल्याण और परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत किया ! ❜❜

🏵️ सूर्य पुत्र कर्ण की कथा : 〰️
❛❛ महाभारत के महान योद्धा कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे ! वे प्रतिदिन कमर तक जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते थे ! सूर्य की उपासना से ही उन्हें अद्भुत शक्ति और तेज प्राप्त हुआ था ! इसी परंपरा के आधार पर आज भी छठ पर्व में जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है ! ❜❜

🌸 छॅंठी मैया का स्वरूप और महत्व : 〰️
❛❛ छठी मैया को सूर्य देव की बहन कहा जाता है ! वे संतान की रक्षक और सुख-समृद्धि की दात्री मानी जाती हैं ! कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया भगवान ब्रह्मा की पुत्री या प्रकृति का छठा अंश हैं ! कई ग्रंथों में उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पत्नी भी बताया गया है ! ❜❜

🌄 छॅंठ पूजा की विधि और अवधि : 〰️
🏵️ यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है : 〰️

०१. पहला दिन ( नहाय-खाय ) :  〰️
❛❛ व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन करते हैं ! ❜❜

०२. दूसरा दिन ( खरना ) : 〰️
❛❛ दिनभर निर्जला उपवास रखकर शाम को गुड़-चावल की खीर से व्रत की शुरुआत करते हैं। ❜❜

०३. तीसरा दिन ( संध्या अर्घ्य ) : 〰️
❛❛ अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है ! ❜❜

०४. चौथा दिन ( उषा अर्घ्य ) : 〰️
❛❛ उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है ! और ( छठ व्रत का पारण ) व्रती इस दौरान ३६ घंटे तक निर्जल उपवास करते हैं और भगवान सूर्य तथा छठी मैया से संतान, परिवार के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं ! ❜❜

🌞 छॅंठ पूजा का संदेश : 〰️
❛❛ छठ पूजा न केवल सूर्य देव की उपासना का पर्व है, बल्कि यह प्रकृति, जल, और जीवन के प्रति आभार व्यक्त करने का उत्सव भी है ! ❜❜
❛❛ यह व्रत मनुष्य में अनुशासन, शुद्धता, संयम और श्रद्धा का भाव जाग्रत करता है ! ❜❜
❛❛ जो व्यक्ति पूरे समर्पण और भक्ति भाव से छठी मैया की पूजा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, संतान-सुख और समृद्धि का वास होता है ••• !!! ❜❜ ✍
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आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की तो रामायण में रावण के दस सिर की गणना कैसे की गयी...🚩👇👆

आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की तो रामायण में रावण के दस सिर की गणना कैसे की गयी...
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कुछ मलेक्स के  हाई ब्रीड नश्ल द्वारा हिंदू धर्म व रामायण महाभारत गीता को काल्पनिक दिखाने के लिए यह प्रश्न करते है कि जब आर्यभट ने लगभग 6 वीं शताब्दी मे शून्य/जीरो की खोज की तो आर्यभट की खोज से लगभग 5000 हजार वर्ष पहले रामायण मे रावण के 10 सिर की गिनती कैसे की गई। और महाभारत मे कौरवो की 100 की संख्या की गिनीती कैसे की गई। जबकि उस समय लोग (जीरो) को जानते ही नही थे, तो लोगो ने गिनती को कैसे गिना

अब मै इस प्रश्न का उत्तर दे रहा हूँ".
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कृपया इसे पूरा ध्यान से पढे। आर्यभट्ट से पहले संसार 0(शुन्य) को नही जानता था। आर्यभट्ट ने ही (शुन्य / जीरो) की खोज की, यह एक सत्य है। लेकिन आर्यभट्ट ने "0(जीरो) की खोज 'अंको मे' की थी, 'शब्दों' में खोज नहीं की थी, उससे पहले 0 (अंक को) शब्दो मे शुन्य कहा जाता था। उस समय मे भी हिन्दू धर्म ग्रंथो मे जैसे शिव पुराण, स्कन्द पुराण आदि मे आकाश को शुन्य कहा गया है।

 यहाँ पे शुन्य बका मतलव अनंत से होता है। लेकिन रामायण व महाभारत काल मे गिनती अंको मे न होकर शब्दो मे होता था,और वह भी संस्कृत मे।

उस समय "1,2,3,4,5,6,7,8, 9,10 अंक के स्थान पे 'शब्दो' का प्रयोग होता था वह भी 'संस्कृत' के शव्दो का प्रयोग होता था। जैसे:1 = प्रथम 2 = द्वितीय 3 = तृतीय" 4 = चतुर्थ 5 = पंचम"" 6 = षष्टं" 7 = सप्तम"" 8 = अष्टम, 9 = नवंम"" 10 = दशम। "दशम = दस" यानी दशम मे "दस" तो आ गया, लेकिन अंक का 0 (जीरो/शुन्य) नही आया,‍‍ रावण को दशानन कहा जाता है। 'दशानन मतलब दश+आनन =दश सिर वाला' अब देखो रावण के दस सिर की गिनती तो हो गई। लेकिन अंको का 0 (जीरो) नही आया। 

इसी प्रकार महाभारत काल मे संस्कृत" शब्द मे "कौरवो" की सौ की संख्या को "शत-शतम" बताया गया। 'शत्' एक संस्कृत का "शब्द है, जिसका हिन्दी मे अर्थ सौ (100) होता है। सौ(100) को संस्कृत मे शत् कहते है। शत = सौ इस प्रकार महाभारत काल मे कौरवो की संख्या गिनने मे सौ हो गई। लेकिन इस गिनती मे भी "अंक का 00(डबल जीरो)" नही आया,और गिनती भी पूरी हो गई। महाभारत धर्मग्रंथ में कौरव की संख्या शत बताया गया है। 

रोमन में भी 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 की जगह पे (¡), (¡¡), (¡¡¡) पाँच को V कहा जाता है। दस को x कहा जाता है। X= दस इस रोमन x मे अंक का (जीरो/0) नही आया। और हम" दश पढ़ "भी लिए और" गिनती पूरी हो गई! इस प्रकार रोमन मे कही 0 (जीरो) "नही आता है। और आप भी रोमन मे" एक से लेकर सौ की गिनती पढ लिख सकते है। आपको 0 या 00 लिखने की जरूरत भी नही पड़ती है। पहले के जमाने मे गिनती को शब्दो मे लिखा जाता था। उस समय अंको का ज्ञान नही था। जैसे गीता, रामायण मे 1"2"3"4"5"6 या बाकी पाठो  को इस प्रकार पढा जाता है। जैसे (प्रथम अध्याय, द्वितीय अध्याय, पंचम अध्याय,दशम अध्याय... आदि!) इनके दशम अध्याय ' मतलब दशवा पाठ  होता है। दशम अध्याय= दसवा पाठ इसमे 'दश' शब्द तो आ गया। लेकिन इस दश मे 'अंको का 0' (जीरो)" का प्रयोग नही हुआ। बिना 0 आए पाठो की गिनती दश हो गई।

हिंदु विरोधी और नास्तिक लोग सिर्फ अपने गलत कुतर्क द्वारा ‍हिंदू धर्म व हिन्दू धर्मग्रंथो को काल्पनिक साबित करना चाहते है। जिससे हिंदुओं के मन मे हिंदू धर्म के प्रति नफरत भरकर और हिन्दू धर्म को काल्पनिक साबित करके, हिंदू समाज को अन्य धर्मों में परिवर्तित किया जाए। लेकिन आज का हिंदू समाज अपने धार्मिक शिक्षा को ग्रहण ना करने के कारण इन लोगो के झुठ को सही मान बैठता है। यह हमारे धर्म व संस्कृत के लिए हानि कारक है। अपनी सभ्यता पहचानें, गर्व करें की हम सनातनी हैं हम भारतीय हैं ।
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आप शुरुआत में जीते, आप अंत में जीते, आप बीच में भी जीतेंगे।

विज्ञान कहता है

कि एक वयस्क स्वस्थ पुरुष एक बार संभोग के बाद जो वीर्य स्खलित करता है, उसमें 400 मिलियन शुक्राणु होते हैं......

ये 40 करोड़ शुक्राणु मां के गर्भाशय की ओर पागलों की तरह दौड़ते हैं, केवल 300-500 शुक्राणु ही जीवित बचते हैं। और बाकी? वे रास्ते में थक जाते हैं या मर जाते हैं। इन 300-500 शुक्राणुओं में से जो अंडे तक पहुँचने में कामयाब हो जाते हैं, केवल एक अत्यंत शक्तिशाली शुक्राणु ही अंडे को निषेचित करता है या अंडे में बस जाता है। वह भाग्यशाली शुक्राणु आप हैं, मैं हूँ या हम सभी हैं। क्या आपने कभी इस महायुद्ध के बारे में सोचा है?

❒ आप भागे थे - जब आपकी आँखें, हाथ, पैर, सिर नहीं थे, फिर भी आप जीत गए...

❒ आप भागे थे - आपके पास कोई प्रमाणपत्र नहीं था, कोई दिमाग नहीं था, फिर भी आप जीत गए....

❒ आप भागे थे - आपके पास कोई शिक्षा नहीं थी, किसी ने आपकी मदद नहीं की, फिर भी आप जीत गए....

❒ जब आप दौड़े थे - आपके पास एक मंज़िल थी और आपने उस मंज़िल की ओर अपना लक्ष्य निर्धारित किया और अंत तक दौड़े और आप जीत गए....

❒ कई बच्चे अपनी मां के गर्भ में ही मर जाते हैं, लेकिन आप नहीं मरे, आप पूरे 9 महीने जीवित रहे ....

❒ कई बच्चे प्रसव के दौरान मर जाते हैं, लेकिन आप बच गए....

❒ कई बच्चे जन्म के पहले 5 सालों में ही मर जाते हैं, लेकिन आप फिर भी जीवित हैं...

❒ कई बच्चे कुपोषण से मर जाते हैं, लेकिन आपको कुछ नहीं हुआ....

❒ कई लोग वयस्कता की राह पर इस दुनिया को छोड़ गए, लेकिन आप अब भी यहां हैं....

और आज जब भी कुछ होता है, तो आप डर जाते हैं, निराश हो जाते हैं, लेकिन क्यों? आपको ऐसा क्यों लगता है कि आप हार गए हैं? आपका आत्मविश्वास क्यों खो जाता है?

हालांकि अब आपके पास दोस्त हैं, भाई-बहन हैं, सर्टिफिकेट हैं, शिक्षा है....सब कुछ है। आपके पास हाथ-पैर हैं, योजना बनाने के लिए दिमाग है, मदद करने वाले लोग हैं, फिर भी आप उम्मीद खो देते हैं। जब आपने अपने जीवन के पहले दिन हार नहीं मानी थी। आपने 40 करोड़ शुक्राणुओं के साथ मौत से जंग लड़ी और बिना किसी की मदद के अकेले ही प्रतियोगिता जीत ली। फिर निराशा क्यों?

आप शुरुआत में जीते, आप अंत में जीते, आप बीच में भी जीतेंगे। खुद को समय दें, अपने मन से पूछें - आपके पास जो स्किल है, उसे सजाएं संवारे..इनोवेटिव ideas पैदा करें? हुनर सीखें.. स्ट्रगल करें... लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें....रस्ते के बाधाओं से लड़ते रहें, आप खुद ही जीत जाएंगे

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

रामायण में छुपे दस रहस्य,जिनसे हम अपरिचित हैं...अंत तक जरुर पढें🧵

रामायण में छुपे दस रहस्य,जिनसे हम अपरिचित हैं...अंत तक जरुर पढें🧵

रामायण की लगभग सभी कथाओं से हम परिचित ही हैं , लेकिन इस महाकाव्य में रहस्य बनकर छुपी हैं कुछ ऐसी छोटी छोटी कथाएं जिनसे हम लोग परिचित नहीं हैं , तो आइये जानते हैं वे कौन सी दस बातें है।

1. रामायण राम के जन्म से कई साल पहले लिखी जा चुकी थी | रामायण महाकाव्य की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की है। इस महाकाव्य में 24 हजार श्लोक, पांच सौ उपखंड तथा उत्तर सहित सात कांड हैं।

2. वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को, पुनर्वसु नक्षत्र में कर्क लग्न में हुआ था। उस समय सूर्य, मंगल, शनि, गुरु और शुक्र ग्रह अपने-अपने उच्च स्थान में विद्यमान थे तथा लग्न में चंद्रमा के साथ गुरु विराजमान थे। यह सबसे उत्कृष्ट ग्रह दशा होती है , इस घड़ी में जन्म बालक अलौकिक होता है।

3. जिस समय भगवान श्रीराम वनवास गए, उस समय उनकी आयु लगभग 27 वर्ष थी। राजा दशरथ श्रीराम को वनवास नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन वे वचनबद्ध थे। जब श्रीराम को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने श्रीराम से यह भी कह दिया कि तुम मुझे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाओ।4. रामायण के अनुसार समुद्र पर पुल बनाने में पांच दिन का समय लगा। पहले दिन वानरों ने 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन पुल बनाया था। इस प्रकार कुल 100 योजन लंबाई का पुल समुद्र पर बनाया गया। यह पुल 10 योजन चौड़ा था। (एक योजन लगभग 13-16 किमी होता है)।

5. सभी जानते हैं कि लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटे जाने से क्रोधित होकर ही रावण ने सीता का हरण किया था, लेकिन स्वयं शूर्पणखा ने भी रावण का सर्वनाश होने का श्राप दिया था। क्योंकि रावण की बहन शूर्पणखा के पति विद्युतजिव्ह का वध रावण ने कर दिया था। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।6. कहते हैं जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी, और वे एक सिरे से दूसरे सिरे तक जा रहे थे, तो उनकी नजर शनी देव पर पड़ गयी ! वे एक कोठरी में बंधे पड़े थे ! हनुमान जी ने उन्हें बंधन मुक्त किया ! मुक्त होने पर उन्होंने हनुमान जी के बल बुद्धी की भी परिक्षा ली और जब उन्हें यकीन हो गया कि वह सचमुच में भगवान रामचंद्र जी के दूत हनुमान जी हैं तो उन्होंने हनुमान जी से कहा कि "इस पृश्वी पर जो भी आपका भक्त होगा उसे मैं अपनी कुदृष्टि से दूर ही रखूंगा, उसे कभी कोइ कष्ट नहीं दूंगा " ! इस तरह शनिवार को भी मदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ होता है तथा आरती गाई जाती है !

7. जब खर दूषण मा रे गए, तो एक दिन भगवान राम चन्द्र जी ने सीता जी से कहा, "प्रिये अब मैं अपनी लीला शुरू करने जा रहा हूँ ! खर दूषण मारे गए, सूर्पनखां जब यह समाचार लेकर लंका जाएगी तो रावण आमने सामने की लड़ाई तो नहीं करेगा बल्की कोई न कोई चाल खेलेगा और मुझे अब दुष्टों को मारने के लिए लीला करनी है ! जब तक मैं पूरे राक्षसों को इस धरती से नहीं मिटा देता तब तक तुम अग्नि की सुरक्षा में रहो" ! भगवान् रामचंद्र जी ने उसी समय अग्नि प्रज्वलित की और सीता जी भगवान जी की आज्ञा लेकर अग्नि में प्रवेश कर गयी ! सीता माता जी के स्थान पर ब्रह्मा जी ने सीता जी के प्रतिबिम्ब को ही सीता जी बनाकर उनके स्थान पर बिठा दिया !8. अग्नि परीक्षा का सच :- रावण जिन सीतामाता का हरण कर ले गया था वे सीता माता का प्रतिबिम्ब थीं , और लौटने पर श्री राम ने यह पुष्टि करने के लिए कि कहीं रावण द्वारा उस प्रतिबिम्ब को बदल तो नहीं दिया गया , सीतामाता से अग्नि में प्रवेश करने को कहा जो कि अग्नि के घेरे में पहले से सुरक्षित ध्यान मुद्रा में थीं , अपने प्रतिबिम्ब का संयोग पाकर वे ध्यान से बाहर आईं और राम से मिलीं।

9. आधुनिक काल वाले वानर नहीं थे हनुमान जी :- कहा जाता है कि कपि नामक एक वानर जाति थी। हनुमानजी उसी जाति के ब्राह्मण थे।शोधकर्ताओं के अनुसार भारतवर्ष में आज से 9 से 10 लाख वर्ष पूर्व बंदरों की एक ऐसी विलक्षण जाति में विद्यमान थी, जो आज से लगभग 15 हजार वर्ष पूर्व विलुप्त होने लगी थी और रामायण काल के बाद लगभग विलुप्त ही हो गई। इस वानर जाति का नाम `कपि` था। मानवनुमा यह प्रजाति मुख और पूंछ से बंदर जैसी नजर आती थी। भारत से दुर्भाग्यवश कपि प्रजाति समाप्त हो गई, लेकिन कहा जाता है कि इंडोनेशिया देश के बाली नामक द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है।

10. विश्व में रामायण का वाचन करने वाले पहले वाचक कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान श्री राम के पुत्र लव और कुश थे | जिन्होंने रामकथा स्वयं अपने पिता श्री राम के आगे गायी थी | पहली रामकथा पूरी करने के बाद लव कुश ने कहा भी था हे "पितु भाग्य हमारे जागे, राम कथा कहि श्रीराम के आगे"।

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

कभी सोचा है कि धर्म भी अब ‘पैकेज’ में मिलने लगा है

*धर्म बिकाऊ है* 


कभी सोचा है कि धर्म भी अब ‘पैकेज’ में मिलने लगा है?
 • ₹11,000 दीजिए — सामने बैठकर पूजन कीजिए।
 • ₹51,000 दीजिए — स्वर्ण कलश पर आपका नाम।
 • ₹1,00,000 दीजिए — साधुजी आपके घर पधारेंगे।
 • ₹5,00,000 दीजिए — आशीर्वाद के साथ आपकी प्रशंसा मंच से।

धर्म अब मोक्ष का मार्ग नहीं रहा, अब ये एक रेट कार्ड है।
और ये कोई मज़ाक नहीं है।
ये वो कड़वा सच है जिसे हमने देखना छोड़ दिया है।
या कहें — देख कर भी अनदेखा कर दिया है।
1. संयम का चोला, लेकिन भीतर राजसी ठाठ
एक दौर था जब साधु संत निर्वस्त्र होते थे — लेकिन फिर भी पूरे समाज को लज्जा सिखा जाते थे।
आज?
 • चरण रक्षक गाड़ी से चलते हैं।
 • हर दो कदम पर स्वागत मंडप लगता है।
 • उनके साथ मीडिया टीम होती है जो वीडियो बनाती है।
 • और अगर प्रवचन में भीड़ न हो, तो नाराज़गी दिखती है।
किससे पूछें — ये कौन-सा त्याग है?
क्या अब संयम का मूल्य भी ‘डेकोरेशन’ से तय होगा?
2. ट्रस्टियों की राजनीति — धर्म के नाम पर निजी एजेंडा
मंदिर कभी समुदाय के आत्मिक विकास के केंद्र थे।
अब वे कुछ खास लोगों के ‘क्लब’ बन गए हैं।
 • ट्रस्टी कौन बनेगा, इसका फैसला अब सेवा से नहीं — गुटबाज़ी और चापलूसी से होता है।
 • मंदिर की नीतियाँ ‘धार्मिक’ नहीं, ‘राजनीतिक’ हो गई हैं।
 • मूर्ति प्रतिष्ठा हो या चातुर्मास — किसे बुलाया जाए, ये फैसला आम आदमी नहीं, कुछ गिने-चुने लोग करते हैं — वो भी “कमीशन” देखकर।
और अगर कोई सजग व्यक्ति सवाल पूछे, तो उसे समाज-विरोधी करार दे दिया जाता है।
क्या यही है हमारी धर्मरक्षा?
3. आयोजन या कारोबार?
अब हर धार्मिक आयोजन ‘इवेंट’ है।
 • साउंड सिस्टम किसका होगा?
 • फूल कौन देगा?
 • प्रसाद किसकी केटरिंग से आएगा?
 • भजन मंडली किस गायक की होगी?
इन सब में भी ‘डीलिंग’ होती है।
कई जगह तो यही देखा गया है कि मंच पर बैठने के लिए भी ‘चढ़ावे’ की सीमा तय है।
साधुजी की ‘आशंका’ पर कौन बोले?

जिस आयोजन का मकसद आत्मशुद्धि था, अब वह पूरा एक वाणिज्यिक शो बन चुका है।
4. साधुजी आएंगे — लेकिन रेट के साथ
आजकल यह भी चर्चा का विषय होता है कि किस साधुजी कहां रुकेंगे।
और ये निर्णय किस आधार पर होता है?
 • कहाँ ज्यादा भव्य स्वागत मिलेगा।
 • कहाँ ज्यादा दानदाताओं की भीड़ है।
 • किस तीर्थ की कमेटी ज़्यादा खर्च कर सकती है।
 • और किस जगह ‘राजनीतिक पकड़’ ज्यादा है।
त्याग की जगह अब “आकर्षण” ने ले ली है।
भक्ति की जगह अब “प्रायोजक” आ गए हैं।
और धर्म की जगह अब “डीलिंग” चल रही है।
5. समाज मौन क्यों है?
सब कुछ सामने है —
लेकिन हम सब मौन हैं।
क्यों?
 • डरते हैं कि “संघ-विरोधी” कहे जाएंगे।
 • सोचते हैं — “हम कौन होते हैं बोलने वाले?”
 • कुछ तो इसलिए चुप हैं कि कहीं उनकी दुकान न बंद हो जाए।
पर क्या हम नहीं जानते कि —
चुप रहना भी एक प्रकार की सहमति है।

और हमारी यही चुप्पी इन “धर्म के दलालों” को और ताकत देती है।
अब भी समय है — चेत जाओ!
अब वक्त आ गया है:
 • साधुओं से स्पष्ट सवाल पूछिए — तपस्या है या तमाशा?
 • ट्रस्टियों से हिसाब मांगिए — मंदिर का पैसा कहां गया?
 • समाज को जगाइए — धर्म रक्षा सिर्फ माला जपने से नहीं, हिम्मत दिखाने से होती है।
हमारे पूर्वजों ने धर्म को सिर्फ पूजा-पाठ में नहीं, आचरण में जिया था।
और हमने? उसे “इवेंट” बना डाला।
निष्कर्ष — धर्म बचाना है, तो खरीदी बंद करनी होगी
याद रखिए —
धर्म बिकने की चीज़ नहीं है।
अगर आप देख रहे हैं कि धर्म बिक रहा है — और आप फिर भी चुप हैं —
तो आप केवल दर्शक नहीं, भागीदार हैं।

आप मंदिर में जाएं, लेकिन आंखें खोलकर।
आप साधु के पास जाएं, लेकिन विवेक के साथ।
आप आयोजन करें, लेकिन बिना दिखावे के।
धर्म हमारी आत्मा की आवाज़ है —
उसे ध्वनि सिस्टम और बजट से मत दबाइए।

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गोवर्धन पूजा पर श्री स्वामीनारायण अक्षरधाम, काली बेरी जोधपुर में भव्य अन्नकूट महोत्सव का आयोजन।

*- गोवर्धन पूजा पर श्री स्वामीनारायण अक्षरधाम, काली बेरी जोधपुर में भव्य अन्नकूट महोत्सव का आयोजन।*


 गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर आज श्री स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर, काली बेरी में भव्य अन्नकूट महोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर भगवान श्री स्वामीनारायण को 701 विविध व्यंजन का अन्नभोग अर्पित किया गया।

महोत्सव की शुरुआत पूज्य योगीप्रेम स्वामी द्वारा गाए गए ‘थाल गीत’ से हुई, जिसके साथ ही भक्तों ने भक्ति एवं आनंद के भाव से अन्नकूट दर्शन किए। विविध व्यंजनों से सजे भव्य थाल के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। अन्नकूट के उपरांत संध्या में आयोजित लाइट एंड साउंड शो ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्री स्वामीनारायण की दिव्य लीलाओं और आध्यात्मिक संदेशों पर आधारित यह कार्यक्रम आज के उत्सव का मुख्य आकर्षण रहा।

आश्चर्यजनक रूप से इस वर्ष के अन्नकूट महोत्सव में 20,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। भारी संख्या में भक्तों के आगमन के कारण मंदिर परिसर से लेकर नमस्ते सर्किल तक लगभग 2 किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। इस विशाल भीड़ व्यवस्था को स्वयंसेवकों (स्वयंसवेकों) और पुलिस प्रशासन ने अत्यंत अनुशासित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संभाला, जिससे सभी श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक दर्शन का लाभ प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर जोधपुर पुलिस आयुक्त एवं उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और दर्शन लाभ प्राप्त किया।

🪔 अन्नकूट का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
अन्नकूट महोत्सव का आयोजन गोवर्धन पूजा के अगले दिन किया जाता है। यह भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा एवं इंद्र के अभिमान के दमन की स्मृति में मनाया जाता है। ‘अन्नकूट’ का अर्थ है – अन्न का पर्वत। इस दिन भगवान को सैकड़ों प्रकार के व्यंजन अर्पित कर ‘अन्नकूट दर्शन’ किए जाते हैं। इसका भावार्थ यह है कि सम्पूर्ण सृष्टि में भगवान ही पालक हैं और अन्न के रूप में वही हमें जीवन प्रदान करते हैं।

स्वामीनारायण परंपरा में अन्नकूट केवल भोजन अर्पण का नहीं, बल्कि कृतज्ञता, भक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है। भक्तजन इस दिन अपने श्रम, प्रेम और भक्ति से भगवान को अर्पण करते हैं, जिससे समाज में सेवा, त्याग और समर्पण की भावना का विस्तार होता है।

इस भव्य आयोजन ने न केवल जोधपुरवासियों को एक दिव्य अनुभव प्रदान किया, बल्कि सांस्कृतिक रूप से यह आयोजन जोधपुर शहर के आध्यात्मिक जीवन का एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया।

🪔 जय स्वामीनारायण

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