बुधवार, 15 अगस्त 2012

हिंदू के गले में और/या भुजा में ताबीज सुशोभित है वह भी मुसलमानों की ही देन है |

 
आज लगभग हर हिंदू के गले में और/या भुजा में ताबीज सुशोभित है वह भी मुसलमानों की ही देन है | हमारे में से बहुत सारे भाई-बहन सबेरे या शाम या सप्ताह में कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ किया करते हैं और कहते हैं “काँधे मूँज जनेऊ साजे” | जिसका अर्थ होता है कि चार वेदों के विद्वान हनुमान जी अपने शरीर पर जनेऊ पहनते थे और उनका शरीर जनेऊ से सुशोभित लगता था |

पर हनुमान चालीसा का पाठ करने वाला भक्त स्वयं जनेऊ नहीं पहनता | अगर वह पहनता है तो फिर मुस्लिमों का दिया हुआ ताबीज ही पहनता है | अपने गले में या बांह में लटकाए या बांधे ताबीज को क्या कभी आपने तोड़ कर या खोल कर देखा है ???

आखिर इसमें है क्या ??

यदि नहीं ! - तो अब कर के देखें | आप पाएंगे वो अक्षर या लकीरें जो समझ नहीं आने वाली | इन ताबीजों में अरबी भाषा में लिखा होता है | इस अरबी भाषा को पढ़ना और उसका अर्थ बताना आपके परिवार या आसपड़ोस के हर सदस्य के लिए कठिन काम हो जायेगा | यदि हम इसे पढ़ नहीं सकते या अर्थ नहीं जानते तो फिर बाँधने / पहनने से क्या लाभ ? क्यों पहने हम ?

अरे ! बाँधना ही है तो आप गायत्री मंत्र लिख कर बाँध लें ! पन्डित रुचिराम जी ने अरब देश में सात साल रह कर अनेक मुस्लिमों के गलें में गायत्री मंत्र का ताबीज बना-बना कर पहनवाया था | क्या हम ऐसा नहीं कर सकते ? अगर हम गायत्री मंत्र का ताबीज मुसलमान को नहीं पहना सकते तो फिर अरबी में लिखी कुर्-आन की एक आयत से बना ताबीज अपने गले क्यों ???? और वो भी जनेऊ उतारने कि कीमत पर ???? कभी नहीं | ऐसा कभी नहीं होना चाहिए |
दूसरा, यदि एक मंत्र को ही गले या बाँह में बाँधने से लाभ मिलता है तो फिर तो पूरी कि पूरी पुस्तक ही क्यों न बांध ली जाये ? जरा ठहरें ! और किसी काम को करने से पहले विचार करें | हमारे कुछ हिंदू भाई भी नक़ल करने में बहुत माहिर हैं, ताबीज का हिंदू संस्करण भी निकाल लिया गया है | आपने सुना होगा “हनुमान सिद्ध मंत्र अभिषिक्त लॉकेट” आदि आदि | ये सब क्या है ? ये सब के सब ताबीज के ही तो रूपांतरण हैं |

यदि हनुमान लॉकेट पहनने से हमारे दुःख दूर होंगे तो फिर हनुमान जी अपने दुःख दूर करने के लिए क्या पहनते थे ? क्या हनुमान जी भी कोई मन्त्र अभिषिक्त यन्त्र या लॉकेट पहना करते थे ? नहीं | हनुमान जी स्वयं चारों वेदों के पण्डित थे और सारे के सारे मंत्र उनको याद थे तो फिर वे कौन सा लॉकेट पहनते ?? आप भी एक मंत्र याद करें और फिर उसका अर्थ याद करें जब मन्त्र और उसका अर्थ याद हो जाय तब दूसरा मंत्र याद करना शुरू कर दें और यह क्रम सतत चलता रहना चाहिए |

जब सारे मंत्र याद करते-करते सिद्धि प्राप्त हो जायेगी तब मुक्ति अर्थात् सुख आनंद खुद ही मिल जायेगा | तो फिर आज से ही लग जाइये वेद मंत्र याद करने में, उतार कर छोड़ दें ताबीज को और धारण करें जनेऊ जो हनुमान चालीसा में कहे अनुसार आपकी कंचन काया (शरीर) पर शोभा देगा |

जय माँ भारती

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