बुधवार, 15 अगस्त 2012

रुपये की कीमत कम होने से देश का कितना नुक़सान होता है आईये जाने ।


Attention please

रुपये की कीमत कम होने से देश का कितना नुक़सान होता है आईये जाने ।
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कया आप जानते हैं??
15 अगस्त 1947 जब देश आजाद हुआ 1 रुपया 1डालर के बराबर था|
और 1 रुपया 1 पौंड क़ी भी बराबर
था | जो आज 50 रुपये का हो गया हैं..

अब आप पूछो गये की इसमें
परेशानी क्या हैं ???
कृपया अब धीरे-धीरे और आराम से
पढ़े |

परेशानी ये है की 1947 में ज़ब 1
रुपया 1 डालर के बराबर था |तब हम
अमेरिका या की अन्य देश से 1 डालर
का माल (ख़रीदते) थे तो हमे 1
रुपया ही देना पड़्ता था |

मान लीजिए । 1947 में
अमेरिका आपको एक मोबाईल बेचे
और कहे इसकी कीमत 1 डालर हैं ।
तो आपको अमेरिका को 1
रुपया ही देना पड़ेगा ।क्यों कि 1
रुपया तो 1 डालर के बराबर था

लेकिन आज 2011 जब 1 डालर 50
रुपये हो गया है | और आज हम
अमेरिका से एक डालर का माल
(ख़रीदते) हैं तो हमे 50 रुपये देने पड़्ते
हैं ।

मान लीजिए । 2012 में
अमेरिका आपको एक मोबाईल बेचे
और कहे इसकी कीमत 1 डालर हैं ।
तो आपको अमेरिका को 50
रुपया ही देना पड़ेगा ।क्यों क़ि आज
1 डालर 50 रुपये के बराबर हो गया हैं ।

मतलब क्या है | ? ? ?

कि पैसा 50
गुना ज्यादा जा रहा है|
लेकिन माल उतना है आ रहा हैं |

अब इसके उलटा देखते हैं |
1947 में ज़ब
1 रुपया 1 डालर के बराबर था तब हम
अमेरीका को अगर 1 रुपये का माल
(बेचते) थे तो हमे 1 डालर मिलता था

अब मान लीजिए ।1947 में भारत
अमेरिका को मोबाईल बेचे और कहे
इसकी कीमत 1रुपया हैं।
तो अमेरिका को 1 डालर
ही देना पड़ेगा । क्यों कि 1
रुपया तो 1 डालर के बराबर था

और अब 2011 में 1 डालर 50 रुपये
का हो गया हैं | अब हमे
अमेरीका को 50 रुपये का माल
देना पड़्ता हैं | लेकिन डालर 1
मिलता हैं |

अब मान लीजिए ।2012 में भारत
अमेरिका को 50 मोबाईल बेचने पड़ेगें
तो अमेरिका हमको 1 डालर देगा ।
क्यों क़ि
1 डालर 50 रुपये का हो गया हैं | अब 1
डालर कमाने के लिए 50 रुपये का माल देना पाड़ेगा ।

मतलब क्या है ।? ? ? ?

माल 50 गुना ज्यादा जा रहा है लेकिन डालर 1 ही आ रहा है ।

एक और उदाहरण देकर अपनी बात
पुरी करता हूँ
पिछले साल भारत ने 5 लाख करोड़
रु पये का माल बेचा (निर्यात)
किया . वो तब है जब 1 डालर 50 रुपये का हैं.

अब मान लिये जिये 1 डालर 1 रुपये का ही होता और हम इतने रुपये का माल ही बेचते ।
मतलब उस माल ke kimat 250 लाख
करोड़ थी
जिसको भारत सरकार ने
5 लाख करोड़ में बेच दिया.

मतलब पिछले साल माल बेचने
(निर्यात) पर 245 लाख करोड़ का घाटा ।

और इसके उलटा बोले तो पिछले
साल हमने 8 लाख करोड़ का माल
(आयात किया) ख़रीदा |

और वो तब है जब 1 डालर 50 रुपये
का है अब मान लिये जिये 1 डालर 1 रुपये का ही होता और हम इतने रुपये का माल ही ख़रीदते
मतलब 16 हजार करोड़ का माल
हमे 8 लाख करोड़ में ख़रीदना पड़ा. मतलब पिछले साल माल (आयात
पर)ख़रीदने पर 7 लाख 84 करोड़
का घाटा. दोनो को मिला दिया जाये
245+7.86=252 लाख 86 हजार
करोड़ का घाटा. माल ख़रीदा तो घाटा माल
बेचा तो घाटा.

यही पिछले 64 साल
से हो रहा हैं.
जिसकी जिम्मेदार
64 साल से हमारा खून पीने
वाली सिर्फ़ कांग्रेस, कांग्रेस और कांग्रेस हैं.


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